प्रयागराज: संगमनगरी में इस समय बाढ़ ने हालात बेहद मुश्किल कर दिए हैं. गंगा और यमुना का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर चुका है और घाटों से लेकर मंदिर, आश्रम और मेला क्षेत्र तक पानी में डूबे हुए हैं. लेकिन इस आपदा के बीच झूंसी पुल के नीचे जल रही एक अखंड ज्योति लोगों का ध्यान खींच रही है. बाढ़ के चारों ओर पानी होने के बावजूद यह ज्योति लगातार जल रही है. इसे देवरहा बाबा के शिष्य और ‘मचान वाले बाबा’ के नाम से मशहूर रामदास महाराज की आस्था और सेवा का प्रतीक माना जा रहा है.
झूंसी पुल के नीचे संगम क्षेत्र में एक स्थायी मचाननुमा मठ बना हुआ है. बताया जाता है कि यह पूरे संगम क्षेत्र में ऐसा एकमात्र स्थान है, जो पूरे साल इसी जगह मौजूद रहता है. करीब 10 फीट ऊंचे चबूतरे पर बने इस पंडाल में लगभग 80 फीट ऊंचा लोहे का खंभा है. इसके ऊपर शीशे से सुरक्षित एक मंच बनाया गया है, जहां लंबे समय से अखंड ज्योति प्रज्वलित है. बाढ़ का पानी बढ़ने के बावजूद ज्योति की सेवा बंद नहीं हुई. नाव के सहारे मचान तक पहुंचकर इसकी देखभाल की जा रही है. यही वजह है कि बाढ़ के बीच भी यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण बना हुआ है.
महाराज की सेवा भावना अद्वितीय
रामदास महाराज देवरहा बाबा के शिष्य हैं और करीब 20 वर्षों से इस अखंड ज्योति की सेवा कर रहे हैं. वह ज्योति में देसी घी का इस्तेमाल करते हैं और पूजा-पाठ के लिए कई-कई दिनों तक मचान से नीचे नहीं उतरते. बाढ़ के दौरान भी उन्होंने नाव से मचान तक पहुंचकर ज्योति की सेवा जारी रखी. उनका मानना है कि यह ज्योति देश के कल्याण, धर्म की रक्षा और मानवता की भलाई के लिए जलाई गई है. उनके अनुसार, कैसी भी विपरीत परिस्थिति आए, इसका प्रकाश नहीं रुकना चाहिए.
पंडाल बना आस्था का प्रतीक
मेला लगने के दौरान यह मचाननुमा आश्रम श्रद्धालुओं के बीच खास आकर्षण रहता है. दूर-दूर से लोग यहां पहुंचकर अखंड ज्योति के दर्शन करते हैं और इसकी मान्यता के बारे में जानते हैं. पंडाल को बारिश, गर्मी और बाढ़ जैसे मौसमों को ध्यान में रखकर बनाया गया है. इसकी देखरेख बाबा और उनके शिष्य करते हैं. किसी सरकारी सहायता या संस्था की मदद के बिना ज्योति का लगातार जलते रहना अब लोगों के लिए आस्था और संकल्प की मिसाल बन गया है. बाढ़ से घिरी संगमनगरी में यह रोशनी उम्मीद का संदेश दे रही है.












