500 साल पुराना अनोखा बाजार, जहां हजारों महिलाएं संभालती हैं कारोबार

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unique 500-year-old market
Grok

नई दिल्ली: मणिपुर की राजधानी इंफाल में स्थित एक ऐसा बाजार है, जो अपनी अनोखी पहचान के कारण न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया में फेमस है. बता दें, इस बाजार की सबसे खास बात यह है कि यहां सभी दुकानें महिलाओं द्वारा चलाई की जाती हैं. वहीं स्थानीय भाषा में इसे “इमा कीथल” कहा जाता है, जिसका मतलब होता है “मां का बाजार”.  सदियों पुराना यह बाजार महिला सशक्तिकरण और आर्थिक आत्मनिर्भरता का एक जीता-जागता उदाहरण माना जाता है. 

एशिया का सबसे बड़ा महिला बाजार 

खास बात है कि इमा कीथल को एशिया के सबसे बड़े महिला बाजारों में गिना जाता है. यहां रोजाना हजारों महिलाएं विभिन्न प्रकार के उत्पादों की बिक्री करती हैं और बाजार में सब्जियां, फल, मछली, मसाले, पारंपरिक वस्त्र, हस्तशिल्प, आभूषण और घरेलू उपयोग की कई वस्तुएं उपलब्ध रहती हैं. यही वजह की सुबह से लेकर देर शाम तक यहां खरीददारों की चहल-पहल बनी रहती है.

सौ साल पुरानी प्रथा 

इतिहासकारों के अनुसार इस बाजार की जड़ें कई सौ साल पुरानी हैं. माना जाता है कि पुराने समय में जब पुरुषों को सैन्य सेवाओं या अन्य कार्यों के लिए घर से दूर भेजा जाता था, तब महिलाओं ने स्थानीय व्यापार और आर्थिक गतिविधियों की जिम्मेदारी संभाल ली. धीरे-धीरे यह परंपरा इतनी मजबूत हो गई कि बाजार पूरी तरह महिलाओं के नियंत्रण में आ गया. 

5 हजार से अधिक संभालती है कारोबार 

आज इस बाजार में 5,000 से अधिक महिला विक्रेता सक्रिय रूप से कारोबार करती हैं. खास बात यह है कि यहां कई दुकानें पीढ़ियों से एक ही परिवार की महिलाओं द्वारा संचालित की जा रही हैं. मां से बेटी को दुकान सौंपने की परंपरा ने इस बाजार को एक पारिवारिक और सांस्कृतिक पहचान बना दिया है. 

अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा 

इमा कीथल केवल व्यापार का केंद्र नहीं है, बल्कि मणिपुर की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा भी है. यहां ग्रामीण इलाकों से सीधे कृषि उत्पाद, मछलियां और हस्तनिर्मित वस्तुएं पहुंचती हैं, जिससे स्थानीय उत्पादकों को भी लाभ मिलता है. इसके अलावा इतिहास में यह बाजार सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों से भी जुड़ा रहा है. बता दें, ब्रिटिश शासन के दौरान महिलाओं ने अन्यायपूर्ण नीतियों के खिलाफ आंदोलनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. यही कारण है कि इमा कीथल आज सिर्फ एक बाजार नहीं बल्कि मणिपुर की संस्कृति माना जाता है.

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