नहाना छोड़कर पसीने की बदबू पर भरोसा! Gen-Z का ‘फेरोमोन-मैक्सिंग’ ट्रेंड वायरल

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Gen Z dating trend
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नई दिल्ली: अगर आपको लगता है कि डेट पर जाने से पहले नहाना, साफ कपड़े पहनना और डियोडोरेंट लगाना बेसिक तैयारी है, तो जेन-जी का एक वायरल ट्रेंड आपकी सोच बदल सकता है. सोशल मीडिया पर इन दिनों ‘फेरोमोन-मैक्सिंग’ तेजी से चर्चा में है. इस ट्रेंड में कुछ युवा डेटिंग से पहले नहाने और डियोडोरेंट लगाने से जानबूझकर बच रहे हैं. उनका दावा है कि शरीर की प्राकृतिक गंध छिपाने के बजाय उसे बनाए रखना उन्हें संभावित पार्टनर के सामने ज्यादा आकर्षक बना सकता है.

टिकटॉक और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस ट्रेंड से जुड़े वीडियो खूब वायरल हो रहे हैं. खासकर अमेरिका और ब्रिटेन के कुछ जेन-जी यूजर्स इसे लेकर वीडियो और रील्स बना रहे हैं. कई पोस्ट में लोग अपनी नेचुरल बॉडी ओडर को आकर्षण से जोड़ते नजर आते हैं.

क्या है ‘फेरोमोन-मैक्सिंग’ ट्रेंड?

इस ट्रेंड के पीछे सोच काफी सीधी है. इसे फॉलो करने वाले मानते हैं कि शरीर से आने वाली प्राकृतिक गंध को परफ्यूम, डियोडोरेंट या नहाने के जरिए पूरी तरह हटाने के बजाय बरकरार रखा जाए. उनका मानना है कि यही नेचुरल स्मेल किसी संभावित पार्टनर को उनकी ओर आकर्षित कर सकती है. इसी सोच के चलते कुछ युवा डेट से पहले डियोडोरेंट या परफ्यूम का इस्तेमाल नहीं करते. कुछ लोग तो लंबे समय तक न नहाने की बात भी सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं. कुछ वायरल वीडियो में लोग पसीने वाले कपड़ों में ही डेट पर जाने को इस ट्रेंड का हिस्सा बताते हैं.

वाइस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सोशल मीडिया पर ऐसे लोगों की संख्या बढ़ती दिखाई दे रही है, जो मानते हैं कि शरीर की प्राकृतिक गंध आकर्षण बढ़ाने में मदद कर सकती है. हालांकि, इस दावे को लेकर वैज्ञानिक तस्वीर अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. यह ट्रेंड इंटरनेट पर मौजूद ‘लुक्समैक्सिंग’ संस्कृति से भी जुड़ा हुआ है. इसमें लोग अपनी शक्ल-सूरत और पर्सनैलिटी को ज्यादा आकर्षक बनाने के लिए अलग-अलग तरीके आजमाते हैं. कुछ तरीके सामान्य होते हैं, जबकि कुछ काफी असामान्य और हद से आगे जाने वाले भी हो सकते हैं.

क्या इंसानों में सच में होते हैं फेरोमोन?

फेरोमोन ऐसे रासायनिक संकेत माने जाते हैं, जिनका इस्तेमाल कई जानवर एक-दूसरे तक व्यवहार, खतरे या प्रजनन से जुड़ी जानकारी पहुंचाने के लिए करते हैं. जानवरों में इन संकेतों की भूमिका वैज्ञानिक रूप से अच्छी तरह दर्ज की गई है. लेकिन इंसानों के मामले में इसका जवाब इतना आसान नहीं है. वैज्ञानिक लंबे समय से यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या इंसानों में भी ऐसे रासायनिक संकेत मौजूद हैं, जो दूसरे व्यक्ति के आकर्षण को प्रभावित करते हैं. 

कुछ अध्ययनों में यह संकेत जरूर मिले हैं कि इंसान एक-दूसरे की प्राकृतिक गंध को अलग-अलग तरह से महसूस कर सकते हैं. ‘स्वेटी टी-शर्ट’ जैसे प्रयोगों में भी शरीर की गंध और पसंद के बीच संभावित संबंध के संकेत मिले हैं. इसके बावजूद अब तक वैज्ञानिक तौर पर यह साबित नहीं हुआ है कि इंसानों में जानवरों की तरह कोई खास फेरोमोन होता है, जो सीधे किसी व्यक्ति को रोमांटिक या यौन रूप से आकर्षित करता हो.

क्या न नहाने से बढ़ सकता है आकर्षण?

यहीं सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों और वैज्ञानिक समझ में अंतर सामने आता है. विशेषज्ञों के अनुसार, अगर शरीर की प्राकृतिक गंध और आकर्षण के बीच कोई संबंध है भी, तो वह बहुत जटिल है. इसे सिर्फ नहाना बंद करके या डियोडोरेंट छोड़कर बढ़ाने का कोई पक्का तरीका सामने नहीं आया है. व्यक्ति की बॉडी ओडर कई चीजों से प्रभावित होती है. इसमें जेनेटिक्स, खानपान, हार्मोन, त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया और व्यक्तिगत स्वच्छता जैसी चीजें शामिल हैं. इसलिए केवल शॉवर लेना बंद कर देने से किसी व्यक्ति की आकर्षकता बढ़ जाएगी, ऐसा साबित करने वाला मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण फिलहाल उपलब्ध नहीं है.

सोशल मीडिया पर क्यों वायरल हो रहा है ट्रेंड?

विशेषज्ञ फेरोमोन-मैक्सिंग को इंटरनेट की उस संस्कृति का हिस्सा मानते हैं, जहां लोग अपनी जिंदगी के अलग-अलग हिस्सों को बेहतर या ‘ऑप्टिमाइज’ करने की कोशिश करते हैं. इसी तरह की सोच से ‘मैक्सिंग कल्चर’ का विस्तार हुआ है. ऑनलाइन कई समुदायों में यह विचार लोकप्रिय है कि डेटिंग और आकर्षण को कुछ खास तरीकों से बेहतर बनाया जा सकता है. कुछ युवाओं के लिए ऐसे ट्रेंड डेटिंग को लेकर आत्मविश्वास, सामाजिक दबाव और अपनी पहचान से जुड़ी चिंताओं को भी दिखाते हैं.

इंटरनेट पर मौजूद कुछ समूह यह मानते हैं कि रिश्तों में सफलता के लिए व्यक्ति को अपने लुक्स, फिटनेस, आत्मविश्वास और दूसरी खूबियों को लगातार बेहतर करना चाहिए. फेरोमोन-मैक्सिंग इसी सोच का एक नया और अजीब रूप बनकर सामने आया है.

क्या कहती है साइंस?

फिलहाल वैज्ञानिकों के बीच इस बात पर कोई स्पष्ट सहमति नहीं है कि इंसानों में ऐसे फेरोमोन मौजूद हैं, जो सीधे तौर पर किसी व्यक्ति को रोमांटिक या यौन आकर्षण महसूस करा सकते हैं. कुछ रिसर्च प्राकृतिक गंध और आकर्षण के बीच संभावित छोटे संबंध की ओर इशारा जरूर करती हैं, लेकिन इसे नहाना छोड़ने या शरीर की बदबू को जानबूझकर बनाए रखने से जोड़ना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं माना जा सकता. यानी डेट से पहले शॉवर छोड़ना या डियोडोरेंट न लगाना आपको ज्यादा आकर्षक बना देगा, फिलहाल इस दावे के पीछे ठोस वैज्ञानिक सबूत नहीं है.

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