नई दिल्ली: राजस्थान के कोटा की 15 साल की तन्वी की मंगलवार तड़के दिल्ली के एम्स में मौत हो गई। बता दें, तन्वी को जन्म से ही दिल की बीमारी थी और वह करीब दो साल की उम्र से इलाज के लिए एम्स आ रही थी। जानकारी के अनुसार, उसकी मौत से करीब दो हफ्ते पहले ही उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। तन्वी के पिता मुकेश परियानी का कहना है कि उनकी बेटी की सर्जरी के लिए कई बार तारीख तय हुई, लेकिन ऑपरेशन नहीं हो सका। 18 अगस्त को भी इस मामले को लेकर रिपोर्ट सामने आई थी, जिसमें परिवार ने लंबे समय से चल रहे इलाज को लेकर अपनी परेशानी बताई थी।
कब पता चली थी बीमारी
अस्पताल में भर्ती होने के बाद डॉक्टर तन्वी के हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट की संभावना की जांच कर रहे थे। एम्स के डॉक्टर डॉ. वी. देवागोरौ के मुताबिक, तन्वी को 2012 में VSD और पल्मोनरी एट्रेसिया की बीमारी का पता चला था। 2013 में उसकी सर्जरी को लेकर जांच की गई थी। इसके बाद 2018 में डॉक्टरों ने सुधारात्मक सर्जरी को सही विकल्प नहीं माना और उसका इलाज दवाओं से जारी रखा गया।
डॉक्टर के मुताबिक, 24 अगस्त को तन्वी को हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट के लिए जांच के लिए भर्ती किया गया था। सोमवार को उसकी एंडोस्कोपी भी हुई थी। इसके कुछ घंटे बाद मंगलवार तड़के करीब 2:50 बजे उसकी तबीयत अचानक खराब हो गई। उसे कमजोरी महसूस हुई और उसका शरीर नीला पड़ने लगा। उसका ऑक्सीजन लेवल 48 फीसदी तक गिर गया।
सुबह 5:06 पर थोड़ा दम
सुबह करीब 3:30 बजे उसे ऑक्सीजन दी गई, लेकिन कुछ देर बाद ऑक्सीजन की कमी के कारण उसे कार्डियक अरेस्ट हो गया। डॉक्टरों ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन सुबह 5:06 बजे उसकी मौत हो गई। तन्वी के पिता ने अस्पताल से कई सवालों के जवाब मांगे हैं। उनका आरोप है कि अस्पताल के कर्मचारियों ने उनसे बार-बार दस्तावेज मांगे और कुछ मौकों पर अस्पताल से छुट्टी लेने के लिए भी कहा। वहीं अब उन्होंने बेटी की मौत को लेकर जांच की मांग की है। फिलहाल उन्होंने अस्पताल से बेटी का शव भी नहीं लिया है।
परिवार ने यह भी सवाल उठाया है कि 2013 में सर्जरी के लिए जांच होने के बाद ऑपरेशन क्यों नहीं हुआ और 2018 में सर्जरी को क्यों रोक दिया गया। इन सवालों पर एम्स की ओर से अभी विस्तृत जवाब नहीं दिया गया है। हालांकि परिवार के द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।












