नई दिल्ली: ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला मोजतबा खामेनेई ने लेबनान के सशस्त्र संगठन हिजबुल्लाह की इजरायल के खिलाफ जारी लड़ाई और उसके रुख की खुलकर प्रशंसा की है. उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में “जिहाद और प्रतिरोध” ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है. खामेनेई का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है.
हिजबुल्लाह को बताया अडिग और मजबूत संगठन
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किए गए संदेश में मोजतबा खामेनेई ने हिजबुल्लाह महासचिव शेख नईम कासिम और संगठन के लड़ाकों द्वारा भेजे गए समर्थन पत्र का जवाब दिया. उन्होंने कहा कि हिजबुल्लाह ने इजरायल और उसके सहयोगियों की सैन्य कार्रवाई के सामने “चट्टान की तरह मजबूती” से डटकर मुकाबला किया है. खामेनेई के अनुसार, हिजबुल्लाह का संघर्ष दुनिया भर के उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो अन्याय और दमन के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं.
‘जिहाद और प्रतिरोध ही आगे का रास्ता’
अपने संदेश में खामेनेई ने कहा कि दुनिया के कई देश अमेरिका और इजरायल की नीतियों से परेशान हैं. उनका दावा था कि ऐसे समय में आगे बढ़ने का एकमात्र विकल्प “जिहाद और प्रतिरोध” है. उन्होंने कहा कि हिजबुल्लाह का संघर्ष उन देशों और समुदायों के लिए उम्मीद का संदेश है जो स्वतंत्रता और न्याय की तलाश में हैं.
ईरान ने दोहराया हिजबुल्लाह के समर्थन का संकल्प
मोजतबा खामेनेई ने कहा कि ईरान, हिजबुल्लाह और लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा को अपनी रणनीतिक जिम्मेदारी मानता है. उन्होंने यह भी कहा कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच किसी समझौते के जरिए मौजूदा संघर्ष को समाप्त करने की कोशिश होती है, तो उसमें लेबनान पर इजरायली सैन्य कार्रवाई रोकने की शर्त भी शामिल होनी चाहिए.
दक्षिणी लेबनान और नसरल्लाह को दी श्रद्धांजलि
खामेनेई ने दक्षिणी लेबनान के लोगों की हिम्मत और हिजबुल्लाह के प्रति उनके समर्थन की भी सराहना की. उन्होंने संगठन के पूर्व प्रमुख सैय्यद हसन नसरल्लाह और अन्य मारे गए कमांडरों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनके बलिदान ने हिजबुल्लाह को एक छोटे संगठन से मजबूत शक्ति में बदल दिया और पूरे इस्लामी जगत में लेबनान की प्रतिष्ठा बढ़ाई.












