वृंदावन: ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर किए जा रहे बदलाव अब नई मुश्किलें खड़ी करने लगे हैं। मंदिर में ठाकुरजी को अर्पित करने के लिए श्रद्धालु श्रद्धाभाव से फूलमालाएं लेकर पहुंचते हैं, लेकिन इन मालाओं को भगवान तक पहुंचाने के बजाय प्रवेश द्वार के पास जूते-चप्पलों के नजदीक रखा जा रहा है। मंगलवार शाम इस व्यवस्था का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित होने के बाद मंदिर की व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे हैं। सेवायतों ने इसे मंदिर की मर्यादा और श्रद्धालुओं की भावनाओं के विपरीत बताते हुए नाराजगी जताई है।
भंडारियों की संख्या घटने से बिगड़ी व्यवस्था
दरअसल, मंदिर की उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति ने जगमोहन और वीआईपी कटहरा में श्रद्धालुओं से फूलमाला और प्रसाद लेकर सेवाधिकारी तक पहुंचाने वाले भंडारियों की संख्या कम कर दी है। पहले इन स्थानों पर अधिक भंडारी तैनात रहते थे, लेकिन अब केवल दो भंडारियों के जिम्मे यह व्यवस्था होने से श्रद्धालुओं की ओर से अर्पित की जाने वाली सामग्री को संभालने में परेशानी हो रही है। इसी के चलते मंदिर के प्रवेश द्वार से पहले ही सुरक्षागार्ड श्रद्धालुओं से फूलमालाएं लेकर रेलिंग के पास रखने लगे हैं।
वीडियो वायरल होने पर उठे सवाल
मंगलवार को सामने आए वीडियो में सुरक्षागार्ड श्रद्धालुओं से फूलमालाएं लेकर रेलिंग के समीप रखते दिखाई दे रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि जिस स्थान पर ठाकुरजी को अर्पित करने के लिए लाई गईं मालाएं रखी जा रही हैं, उसी के पास जूते-चप्पल भी रखे हुए हैं। वीडियो सामने आने के बाद श्रद्धालुओं की भावनाओं और मंदिर की परंपराओं को लेकर सवाल उठने लगे। सेवायतों का कहना है कि भगवान को अर्पित करने के उद्देश्य से लाई गई पूजन सामग्री के साथ इस तरह का व्यवहार उचित नहीं है।
सेवायत ने जताई नाराजगी, विरोध दर्ज कराने की बात
मंदिर के सेवायत सदस्य हिमांशु गोस्वामी ने बताया कि उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति की ओर से व्यवस्था में बदलाव किए जाने के बाद भंडारियों की संख्या कम कर दी गई है। जगमोहन और वीआईपी कटहरा में पहले भंडारी श्रद्धालुओं से फूलमाला और प्रसाद लेकर सेवाधिकारी तक पहुंचाते थे। अब सीमित संख्या में भंडारी होने के कारण सुरक्षाकर्मी प्रवेश द्वार से पहले ही मालाएं लेकर रेलिंग के पास रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि मालाओं को जूते-चप्पलों के नजदीक रखना मंदिर की मर्यादा और श्रद्धालुओं की आस्था के अनुकूल नहीं है। इस मामले को समिति के सामने उठाकर विरोध दर्ज कराया जाएगा।












