हिसार: INTACH हिसार चैप्टर का सदैव प्रयास रहा है कि हमारी पारंपरिक कलाओं को संरक्षण देने के साथ-साथ उनसे जुड़े कारीगरों को आत्मनिर्भर बनने के अवसर भी मिलें। इसी उद्देश्य से वर्ष 2021 में राखीगढ़ी में 15 दिवसीय दरी बुनाई कार्यशाला आयोजित की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य इस पारंपरिक कला को पुनर्जीवित करना और स्थानीय महिलाओं को घर बैठे आजीविका कमाने में सक्षम बनाना था। महिलाओं के कौशल को निखारने और उत्पादों के डिजाइन एवं गुणवत्ता में सुधार पर विशेष ध्यान दिया गया।
दरी बुनाई से आत्मनिर्भर बनीं राखीगढ़ी की महिलाएं, INTACH का मिला साथ
आज यह देखकर प्रसन्नता होती है कि राखीगढ़ी की महिलाएँ आत्मविश्वास के साथ दरियाँ बना रही हैं और इससे नियमित आय अर्जित कर रही हैं। INTACH हिसार चैप्टर उन्हें समय-समय पर आवश्यक सहयोग और मार्गदर्शन प्रदान करता रहता है।
मूंज टोकरियों को पर्यटकों की पसंद बना रही महिलाएं, मिली आजीविका
इसी प्रकार, चैप्टर ने मूंज से टोकरियाँ बनाने की पारंपरिक कला को बढ़ावा देने के लिए भी निरंतर प्रयास किए हैं। इन टोकरियों को राखीगढ़ी आने वाले पर्यटकों और आगंतुकों से अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। महिलाओं को कच्चा माल और डिजाइन संबंधी सहयोग देने के साथ-साथ तैयार उत्पादों की खरीद की व्यवस्था भी की जाती है, जिससे उन्हें अपने काम के प्रति विश्वास और नियमित आजीविका का अवसर मिलता है।
विरासत संरक्षण के साथ महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल
हमारा मानना है कि विरासत का संरक्षण तभी सार्थक है, जब उससे जुड़े लोगों के जीवन में भी सकारात्मक बदलाव आए। दरी बुनाई और मूंज शिल्प के माध्यम से हमारा प्रयास इन पारंपरिक कलाओं को जीवंत बनाए रखने के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना है। राखीगढ़ी की महिलाएँ आज इस दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत कर रही हैं।
Reported By: Praveen Kumar












