भारत के स्कूलों में शुरू होगा AI प्रोग्राम, गूगल देगी टीचर्स और स्टूडेंट्स को स्पेशल ट्रेनिंग

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AI Program Launched Indian Schools Google Provide Special Training Teachers Students
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नई दिल्ली: एआई की डिमांड देश विदेश में तेजी से बढ़ रही है. यहीं वजह है जहां एक तरफ एआई की लोगों को नौकरी से निकालने के कारण बन रही है. तो वहीं दूसरी ओर एआई के जरिए  लोग अपनी स्किल्स को आगे बढ़ा रहे है और अपनी फील्ड में बेहरत कार्य करने के अवसर खोज रहे है. इसी के चलते दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनी की लिस्ट में शुमार गूगल अब एक नई पहल करने शुरू करने जा रहा है. जहां एआई का इस्तेमाल सिर्फ ऑफिस तक सिमित नहीं रहेगा. क्या है ये नई पहल चलिए जनता है. 

क्या है एआई ट्रेनिंग प्रोग्राम? 

बता दें, गूगल द्वारा देशभर में स्टूडेंट्स और टीचर्स के लिए एआई ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू शुरू करने का ऐलान किया है. इस एआई ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू के पीछे भारत के एजुकेशन प्लान को नए लेवल ले जाने का उद्देश्य तय किया गया है. इस उद्देश्य के तहत टेक्नोलॉजी-आधारित शिक्षा और कौशल विकास को बढ़ावा दिया जाएगा. इसके साथ ही कंपनी स्कूलों और उच्च शिक्षा संस्थानों में AI टूल्स और डिजिटल लर्निंग पर भी ध्यान केंद्रित करेगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि छात्र और शिक्षक फ्यूचर में आने वाली AI बेस्ड टेक्नोलॉजी के लिए पूरी तरह तैयार रहें. 

एजुकेटर सीरीज लॉन्च 

बता दें, गूगल ने इस ट्रेंनिग प्रोगाम का ऐलान करते हुए एक एआई एजुकेटर सीरीज लॉन्च करने की ही बात कही है. जानकारी के अनुसार, यह एक मोबाइल फर्स्ट ट्रेनिंग प्रोग्राम होगा, जिस भारतीय शिक्षकों की सुविधा के अनुसार खास तौर पर तैयार किया गया है. वहीं इसकी शुऊआत महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और असम और पंजाब के साथ-साथ केंद्र शासित प्रदेश जैसे लद्दाख प्रदेशों में स्कूल के सहयोग से की जाएगी.

क्या-क्या सिखने को मिलेगा 

इस ट्रेनिंग का मकसद शिक्षकों को यह दिखाना है कि क्लासरूम में AI टूल्स का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है. इसके साथ ही यह भी बताया जाएगा AI के इस्तेमाल के कारण कैसे सीखने की प्रक्रिया को और ज्यादा आसान और इंटरैक्टिव कैसे बनाया जा सकता है. इस प्रोग्राम के बारे में जानकारी देते हुए Google ने बताया कि यह ट्रेनिंग मोबाइल-फ्रेंडली होगी, जिससे शिक्षक कहीं से भी आसानी से सीख सकेंगे. शुरुआत में यह छह भारतीय भाषाओं में उपलब्ध होगी, जिनमें हिंदी, असमिया, मराठी, तेलुगु, ओडिया और पंजाबी शामिल हैं.’

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