आगामी सप्ताह दुनिया भर में मनाए जाने वाले बकरीद (ईद-उल-अजहा) के त्योहार को लेकर भारत के विभिन्न राज्यों में प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सार्वजनिक स्थानों के दुरुपयोग को रोकने के लिए दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल की सरकारों ने बेहद कड़े दिशा निर्देश जारी किए हैं. सड़कों पर नमाज पढ़ने और प्रतिबंधित पशुओं की गैरकानूनी कुर्बानी को लेकर उपजे इस विवाद ने अब पूरी तरह से राजनीतिक रंग ले लिया है जिसे आगामी विधानसभा चुनावों से जोड़कर भी देखा जा रहा है.
अलग-अलग राज्यों के कड़े फैसले और प्रशासनिक तैयारी
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकारों ने स्पष्ट कर दिया है कि ईद की नमाज केवल मस्जिदों और ईदगाहों के परिसर के भीतर ही अदा की जाएगी. सड़कों पर बैठकर यातायात बाधित करने की अनुमति किसी को नहीं होगी. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने भी अपील की है कि भीड़ अधिक होने पर मस्जिदों में अलग-अलग शिफ्ट में नमाज पढ़ी जाए. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि आस्था का सम्मान है लेकिन कोई भी कानून-व्यवस्था से ऊपर नहीं है.
दिल्ली
दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंधित श्रेणी में आने वाले जानवरों की कुर्बानी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी. इसके साथ ही कुर्बानी के बाद कचरा प्रबंधन में लापरवाही बरतने वालों पर भी भारी जुर्माना लगाया जाएगा. पश्चिम बंगाल के संदर्भ में अदालत ने स्पष्ट किया है कि गाय की कुर्बानी देना इस्लाम या ईद का अनिवार्य हिस्सा नहीं है.
महाराष्ट्र
महाराष्ट्र सरकार ने पुलिस प्रशासन को बेहद सख्त निर्देश दिए हैं. राज्य में प्रतिबंधित पशुओं की अवैध तस्करी, बिक्री और उन्हें काटने वालों के खिलाफ सीधे ‘मकोका’ जैसी गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी.
पश्चिम बंगाल में अदालती आदेश और सुवेंदु सरकार का रुख
पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नवनिर्वाचित सरकार ने पहले निर्देश जारी किया था कि केवल ‘मेडिकली फिट’ पशुओं की ही कुर्बानी दी जा सकेगी. जब यह मामला हाई कोर्ट पहुंचा तो अदालत ने सरकार के कुछ नियमों में संशोधन करते हुए एक बड़ा आदेश दिया. कोर्ट ने साफ कहा कि गाय की कुर्बानी इस्लाम का मूल हिस्सा नहीं है इसलिए प्रतिबंधित पशुओं की रक्षा सुनिश्चित की जाए. अदालत ने यह भी कहा कि अन्य वैध पशुओं की कुर्बानी के लिए राज्य सरकार नियमों के तहत अनुमति देने पर विचार करे.
चुनाव से पहले ध्रुवीकरण की राजनीति
इस पूरे प्रशासनिक विवाद के पीछे राजनीतिक विश्लेषक आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों और पश्चिम बंगाल के हाल ही में चुनावी नतीजों के समीकरण देख रहे हैं. भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का आरोप है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दलों की तुष्टिकरण की नीतियों के कारण ही आज सरेआम कानूनों का उल्लंघन करने की प्रवृत्ति बढ़ी है. दूसरी तरफ कांग्रेस और विपक्षी दल इसे पूरी तरह से भाजपा की ध्रुवीकरण की राजनीति का हिस्सा बता रहे हैं. बहरहाल सभी राज्यों की पुलिस को इस संवेदनशील मौके पर पूरी तरह अलर्ट पर रहने को कहा गया है.















