नई दिल्ली: दुनिया के कई देशों में इन दिनों जनता का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दे रहा है। भारत से लेकर अमेरिका और यूरोप तक, सरकार की नीतियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं। महंगाई, बेरोजगारी, कम सैलरी और शिक्षा में कटौती जैसे मुद्दों ने लोगों को विरोध करने पर मजबूर कर दिया है।
फ्रांस में फूटा जनता का गुस्सा
फ्रांस में राष्ट्रपति चुनाव से पहले हालात बिगड़ते दिख रहे हैं। यहां दो बड़े कारणों से लोग सड़कों पर हैं। पहला, बढ़ती महंगाई और ईंधन के दाम, और दूसरा, स्कूलों की खराब हालत और शिक्षा बजट में कटौती। यह छात्र आंदोलन पिछले महीने पेरिस से शुरू हुआ था जो अब पूरे देश में फैल चुका है। फ्रांसीसी गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज के मुताबिक इन प्रदर्शनों में करीब 5.5 लाख लोगों ने हिस्सा लिया, जिसमें सिर्फ पेरिस में 1.10 लाख लोग सड़कों पर उतरे। कई जगह पुलिस और प्रदर्शनकारियों में झड़प भी हुई।
यूरोप के अन्य देशों में भी विरोध
पड़ोसी देश बेल्जियम में छात्र यूनिवर्सिटी फीस बढ़ाने और सरकारी खर्चों में कटौती के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। ब्रसेल्स और लिएज में हालात बिगड़ने पर पुलिस को वाटर कैनन तक चलाना पड़ा। पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में हजारों लोगों ने महंगाई, कम वेतन और महंगे मकानों के खिलाफ मार्च निकाला। 2017 के बाद से वहां घरों की कीमतें दोगुनी हो गई हैं, जिससे आम लोगों पर भारी दबाव है।
इटली के मिलान में भी स्थिर सैलरी और रोजमर्रा के बढ़ते खर्चों को लेकर प्रदर्शन हुए। वहीं अल्बानिया में छात्र खराब यूनिवर्सिटी व्यवस्था और नौकरी की कमी को लेकर भड़के हुए हैं। 13 अक्टूबर को तिराना में शिक्षा मंत्रालय के बाहर छात्रों ने ईंटें फेंकी।
तुर्किये, अर्जेंटीना और अमेरिका तक पहुंचा आंदोलन
तुर्किये में पेंशनभोगियों ने बढ़ती महंगाई और कम पेंशन के खिलाफ अंकारा में प्रदर्शन किया। अर्जेंटीना में राष्ट्रपति जेवियर माइली की शिक्षा नीति और बजट कटौती के खिलाफ हजारों छात्र संसद के बाहर जुटे। अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ ‘नो किंग्स’ नेटवर्क ने कई शहरों में रैलियां की। भारत में भी वोटर लिस्ट में SIR की गड़बड़ियों को लेकर विरोध जारी है। साफ है कि दुनिया भर में जनता अपने हक के लिए आवाज उठा रही है।












