नई दिल्ली: रूस और यूक्रेन के बीच पांच साल से चल रहे खूनी संघर्ष के बीच एक भारतीय नेता की भूमिका को खुद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सराहा है। मॉस्को में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण समाधान को लेकर उनके पास बेहद अच्छे विचार हैं।
अंतरराष्ट्रीय रूस विशेषज्ञों के वलदाई फोरम को संबोधित करते हुए पुतिन ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी उन चुनिंदा विश्व नेताओं में शामिल हैं, जो रूस के साथ अच्छे और मैत्रीपूर्ण संबंध होने के बावजूद यूक्रेन संघर्ष को खत्म करने को लेकर लगातार सवाल उठाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की इस मामले में गहरी दिलचस्पी है और आपसी सहमति से समाधान निकालने को लेकर उनके विचार बेहद सराहनीय हैं। पुतिन ने यह भी कहा कि भले ही प्रधानमंत्री तटस्थ रुख अपनाते हों, लेकिन संघर्ष के अंत में उनकी गहरी रुचि साफ झलकती है, और इसके लिए रूस उनका आभारी है।
मोदी पहले भी दोहरा चुके हैं अपना रुख
पिछले महीने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए भारत आए पुतिन के सामने ही प्रधानमंत्री मोदी ने इस मुद्दे पर अपना रुख दोहराया था। 11 सितंबर को हुई बैठक में उन्होंने कहा था कि किसी भी संघर्ष को सुलझाने का एकमात्र रास्ता संवाद और कूटनीति ही है। इससे करीब दो हफ्ते पहले किर्गिस्तान के बिश्केक में हुई एससीओ बैठक के दौरान भी प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन से मुलाकात में अपना चर्चित संदेश “यह युद्ध का युग नहीं है” दोहराया था।
संयुक्त बयान में भी जताई चिंता
उस बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि अब दुनिया को “अंतहीन युद्ध” की स्थिति से निकलकर “युद्ध के अंत” की दिशा में आगे बढ़ना होगा, क्योंकि यही पूरी मानवता की चाहत है। उन्होंने यह भी कहा था कि भारत हमेशा से शांतिपूर्ण समाधान के हर तरीके का समर्थन करता आया है।
दोनों पक्षों से लगातार संवाद में हैं मोदी
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी पुतिन के साथ-साथ यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की से भी लगातार बातचीत करते रहे हैं, और दोनों से उन्होंने फरवरी 2022 में शुरू हुए इस संघर्ष को खत्म करने के लिए संवाद की जरूरत पर जोर दिया है। साल 2022 में भी प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट कहा था कि भारत इस क्षेत्र में स्थायी शांति का समर्थक है, और यह समय मानवता के सामने मौजूद चुनौतियों से एकजुट होकर लड़ने का है, न कि युद्ध का।












