ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची, के अगले हफ़्ते भारत आने की उम्मीद है. रिपोर्टों के अनुसार अराघची 14 और 15 मई को नई दिल्ली में होने वाली BRICS देशों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए भारत आ सकते हैं. ईरान को अब भी उम्मीद है कि भारत की अध्यक्षता में BRICS पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को कम करने में एक रचनात्मक भूमिका निभाएगा. अगर अराघची का यह दौरा होता है तो पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से यह उनकी भारत की पहली यात्रा होगी. इससे पहले मार्च में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बातचीत के दौरान अराघची ने BRICS की भूमिका से जुड़ा मुद्दा भी उठाया था.
ईरान के विदेश मंत्री के अगले हफ्ते भारत आने की उम्मीद
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के 14-15 मई को होने वाली BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए भारत आने की संभावना है. उनकी भागीदारी को लेकर कुछ अनिश्चितता थी लेकिन अब यह समझा जा रहा है कि ईरान ने भारत को सूचित कर दिया है कि यह दौरा फिलहाल विदेश मंत्री के यात्रा कार्यक्रम में शामिल है. चीन के विदेश मंत्री, वांग यी, के इस कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना नहीं है. इसका कारण यह है कि BRICS बैठक की तारीखें डोनाल्ड ट्रम्प और शी जिनपिंग के बीच होने वाले एक अहम शिखर सम्मेलन से टकरा रही हैं जहाँ वांग यी की उपस्थिति अनिवार्य है.
यह बैठक क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत 2026 में BRICS की अध्यक्षता कर रहा है. इस वर्ष का विषय है “लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” (Building for Resilience, Innovation, Cooperation, and Sustainability). यह विषय उस मानव-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाता है जिसमें मानवता को सबसे ऊपर प्राथमिकता दी जाती है. जिसके बारे में प्रधानमंत्री ने 2025 में रियो डी जनेरियो में आयोजित 17वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान बात की थी. यह बैठक मौजूदा अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर और वैश्विक शासन को मज़बूत करने पर ठोस चर्चाओं के लिए एक प्रमुख मंच के रूप में काम करेगी. यह बैठक महत्वपूर्ण चर्चाओं का अवसर प्रदान करेगी. विशेष रूप से उन देशों के लिए जिन्हें वैश्विक आबादी के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाला माना जाता है. 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारियों के तहत रणनीतिक साझेदारियों को मज़बूत करने पर विशेष जोर दिया जाएगा. मारिया जखारोवा ने बताया कि ब्रिक्स साझेदार देशों के विदेश मंत्री बैठक के कई सत्रों में हिस्सा लेंगे. उन्होंने आगे कहा कि नई दिल्ली की अपनी यात्रा के दौरान सर्गेई लावरोव भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी करेंगे.
यात्रा युद्धविराम पर निर्भर
अराघची की भारत यात्रा इस बात पर भी निर्भर करेगी कि अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुआ नाज़ुक युद्धविराम कायम रहता है या नहीं. इस प्रस्ताव में अमेरिका की ओर से धीरे-धीरे प्रतिबंध हटाने की पेशकश शामिल है, जिसके बदले में ईरान को कम से कम 12 वर्षों के लिए अपना यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम स्थगित करना होगा. 2024 में, मिस्र, इथियोपिया, सऊदी अरब और UAE के साथ-साथ ईरान भी इस गुट का सदस्य बन गया. अराघची की यात्रा भारत को ईरान के साथ द्विपक्षीय चिंताओं पर व्यापक चर्चा करने का अवसर प्रदान करेगी जिनमें सबसे प्रमुख मुद्दा LPG आपूर्ति में आने वाली बाधाओं का है. होर्मुज़ जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने के लिए किसी सैन्य गठबंधन में शामिल होने के बजाय भारत ने ईरान के साथ मामलों को कूटनीतिक माध्यमों से सुलझाने का रास्ता चुना है.
















