पश्चिम बंगाल में भाजपा की पहली सरकार बनने और बिहार में कैबिनेट विस्तार के बाद अब उत्तर प्रदेश में भी मंत्रिमंडल विस्तार की तैयारियां तेज हो गई हैं. सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को अपनी सरकार के मंत्रिमंडल में फेरबदल कर सकते हैं, जिसमें छह नए चेहरों को शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है.
सीएम योगी और आनंदीबेन की मुलाकात के क्या है मायने?
कैबिनेट विस्तार की अटकलों के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मुलाकात को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. बताया जा रहा है कि शाम 6:30 बजे होने वाली इस बैठक में मंत्रिमंडल विस्तार को अंतिम रूप देने पर चर्चा हो सकती है. राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात को आगामी फेरबदल का संकेत माना जा रहा है.
फिलहाल उत्तर प्रदेश सरकार में कुल 54 मंत्री कार्यरत हैं. इनमें 21 कैबिनेट मंत्री, 14 राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 19 राज्य मंत्री शामिल हैं. राज्य विधानसभा की कुल 403 सीटों के आधार पर मंत्रिमंडल में अधिकतम 60 मंत्री रखे जा सकते हैं, यानी अभी छह पद खाली हैं. माना जा रहा है कि इन्हीं खाली पदों को भरने के लिए विस्तार की योजना बनाई गई है.
संभावित नए मंत्रियों के नामों को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं. पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी का नाम सबसे प्रमुख दावेदारों में शामिल बताया जा रहा है. इसके अलावा चायल से विधायक पूजा पाल और ऊंचाहार से विधायक मनोज पांडे को भी मंत्री पद मिल सकता है.
इसके साथ ही खागा सीट से विधायक कृष्णा पासवान, हरदोई के मल्लावां से विधायक आशीष सिंह आशु और विधान परिषद सदस्य अशोक कटारिया के नाम भी संभावित सूची में बताए जा रहे हैं. माना जा रहा है कि पार्टी संगठन और सरकार के बीच संतुलन बनाने के लिए इन चेहरों को मौका दिया जा सकता है.
राजनीतिक विश्लेषकों का क्या मानना है?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विस्तार सिर्फ प्रशासनिक जरूरत नहीं, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति का भी हिस्सा है. अगले वर्ष फरवरी में होने वाले चुनावों को देखते हुए भाजपा क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को साधने की कोशिश कर सकती है. नए मंत्रियों के चयन में सामाजिक संतुलन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और राजनीतिक संदेश इन तीनों पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.
















