नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण सैन्य संघर्ष अब पूरे मध्य पूर्व में एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप लेता जा रहा है. लंबे समय तक केवल अपनी सीमा की सुरक्षा और आत्मरक्षा तक सीमित रहने वाले खाड़ी देशों ने अब ईरान के खिलाफ सीधे सैन्य हमले शुरू कर दिए हैं. द वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट के अनुसार, बहरीन और कुवैत ने अपनी वायुसेना के लड़ाकू विमान भेजकर ईरान के भीतर मौजूद मिसाइल डिपो और ड्रोन भंडारण स्थलों को सीधे निशाना बनाया है. इस जवाबी हमले को अंजाम देने के लिए सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने रणनीतिक मदद, इंटेलिजेंस और डिफेंसिव एयर कवर प्रदान किया है.
खाड़ी देशों की रणनीति में ऐतिहासिक बदलाव
अब तक खाड़ी देश संघर्ष के ज्यादा फैलने के डर से ईरान द्वारा दागे गए ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों को बीच हवा में नष्ट करके ही संतोष कर लेते थे. लेकिन ईरान द्वारा लगातार क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने के बाद, बहरीन और कुवैत ने सीधा मोर्चा खोल दिया है. इस पूरे घटनाक्रम के बीच ओमान और कतर जैसे देशों ने अब तक किसी भी प्रकार की प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई से दूरी बना रखी है और संयम बरत रहे हैं.
कुवैत में स्थित अमेरिकी अड्डों पर ताबड़तोड़ हमले
दूसरी ओर, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर मिसाइलों और ‘अराश’ सुसाइड ड्रोन से हमले किए हैं. ईरान के अनुसार, उसने कैंप उडैरी, कैंप दोहा, और कैंप आरिफजान सहित अली अल सलेम एयरबेस पर अमेरिकी राडार और संचार प्रणालियों को निशाना बनाया है. इन हमलों के चलते पूरे कुवैत और बहरीन में सायरन गूँज रहे हैं और नागरिकों को सुरक्षित स्थानों व बंकरों में रहने की हिदायत दी जा रही है.
होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट
अमेरिकी सेना द्वारा ईरान पर लगातार की जा रही बमबारी के जवाब में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. दुनिया के कुल तेल परिवहन का बड़ा हिस्सा इसी जलमार्ग से होकर गुजरता है. यदि यह समुद्री मार्ग बाधित होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और ईंधन की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था एक गहरे आर्थिक संकट में गिर सकती है.











