भारतीय मर्चेंट नेवी कैप्टन अजय पंत पर ब्रिटेन में गंभीर आरोप, पत्नी ने कहा, ‘मेरे पति निर्दोष हैं’

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Russian Shadow Fleet
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नई दिल्ली: समुद्र की तूफानी लहरों के बीच व्यावसायिक जहाजों को सुरक्षित मंजिल तक पहुंचाने वाले एक भारतीय मर्चेंट नेवी कैप्टन आज खुद वैश्विक राजनीति और कानूनी दांव-पेचों के भंवर में फंस गए हैं। रूसी तेल पर लगे प्रतिबंधों के उल्लंघन के आरोप में ब्रिटेन की हिरासत में बंद 38 वर्षीय भारतीय कैप्टन अजय पंत को लेकर उनकी पत्नी रितु पंत का दर्द छलक पड़ा है। उन्होंने बेहद भावुक होकर कहा कि उनके पति निर्दोष हैं और उन्हें महज एक ‘बलि का बकरा’ बनाया गया है। उत्तराखंड के रामनगर के रहने वाले अजय पंत ब्रिटेन में 10 साल तक की जेल की सजा वाले आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे हैं। यह मामला न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि दुनिया भर में काम करने वाले लाखों मर्चेंट सेवारत नाविकों के भविष्य और उनकी कानूनी सुरक्षा पर भी एक गंभीर सवालिया निशान खड़ा करता है।

इंग्लिश चैनल में सनसनीखेज सैन्य कार्रवाई

यह घटनाक्रम 14 जून का है, जब ब्रिटेन के कमांडो ने हेलीकॉप्टर के जरिए इंग्लिश चैनल में रूसी तेल ले जा रहे टैंकर ‘स्मिरतोस’ पर नाटकीय अंदाज में धावा बोला। ब्रिटेन का दावा है कि यह जहाज रूस के उस ‘शैडो फ्रीट’ का हिस्सा है, जिसका इस्तेमाल मॉस्को यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों से बचने के लिए करता है। 
98,000 टन कच्चा तेल लेकर यह टैंकर 5 जून को रूस के उस्त-लुगा बंदरगाह से मिस्र के पोर्ट सईद के लिए रवाना हुआ था। रास्ते में ब्रिटिश कमांडो ने इसे जब्त कर लिया और कैप्टन अजय पंत को गिरफ्तार कर लिया। उस समय ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने इस अभियान की तारीफ करते हुए इसे रूस के खिलाफ एक बड़ा कदम बताया था।

आंसुओं में डूबी गुहार

पति की गिरफ्तारी के बाद एएफपी को दिए अपने पहले साक्षात्कार में 36 वर्षीय रितु पंत ने उस भयावह पल को याद किया जब अजय ने हिरासत से पहली बार उन्हें फोन किया था। रोते हुए रितु ने बताया, वह पूरी तरह टूट चुके थे और फोन पर सिर्फ रो रहे थे। उन्हें समझ ही नहीं आ रहा था कि उनके साथ क्या हो गया। उन्होंने बस इतना कहा कि मैं जेल में हूं, मुझे यहां से बाहर निकालो। ब्रिटिश अदालत द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद से अजय जेल में हैं। रितु का कहना है कि उनके पति सिर्फ अपनी नौकरी कर रहे थे और मालिक के आदेशों का पालन कर रहे थे। एक मर्चेंट नेवी कैप्टन की मुख्य जिम्मेदारी अपने जहाज और माल को सुरक्षित रूप से गंतव्य तक पहुंचाना होता है, न कि उसके पीछे के भू-राजनीतिक विवादों में पड़ना।

नाविकों में दहशत का माहौल

ब्रिटेन के अभियोजकों का तर्क है कि जहाज के मास्टर होने के नाते अजय पंत को माल की प्रकृति और प्रतिबंधों की पूरी जानकारी थी। हालांकि, उनके वकील का स्पष्ट कहना है कि वह केवल पोत मालिक के कर्मचारी थे और उनके निर्देशों का पालन कर रहे थे। यह मामला इसलिए भी बेहद संवेदनशील हो गया है क्योंकि आमतौर पर ऐसे उल्लंघनों में जहाजों या कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए जाते हैं। यह पहला मौका है जब किसी यूरोपीय देश ने सीधे जहाज के कैप्टन पर आपराधिक मुकदमा चलाया है। इस जहाज पर सवार अन्य 24 चालक दल के सदस्यों को रिहा कर भारत भेज दिया गया है, जबकि सिर्फ अजय को कानूनी फंदे में कस दिया गया है। इंडियन सोसाइटी ऑफ इंटरनेशनल लॉ के विशेषज्ञों और ‘ह्यूमन राइट्स एट सी इंटरनेशनल’ जैसे वैश्विक संगठनों का मानना है कि इस केस का फैसला समुद्री कानून के इतिहास में एक बड़ी नजीर पेश करेगा।

वैश्विक शक्तियों के टकराव में पिस्ते बेकसूर नाविक

अंतरराष्ट्रीय परिवहन कर्मचारी महासंघ (ITWF) ने भी इस कार्रवाई पर गहरी चिंता जताई है। महासंघ का कहना है कि वाणिज्यिक जहाजों पर तैनात नाविकों को अक्सर यह अंदाजा भी नहीं होता कि उनके जहाज पर मौजूद माल किन प्रतिबंधों के दायरे में आता है। 
वैश्विक शक्तियों की खींचतान में निर्दोष नाविकों का इस तरह फंसना बेहद खतरनाक है। भारत के पास 3.2 लाख से अधिक समुद्री नाविकों का एक विशाल कार्यबल है। वरिष्ठ भारतीय टैंकर कैप्टन संकेत जोशी के अनुसार, पहली बार सुरक्षा या दुर्घटना के बजाय किसी व्यावसायिक विवाद में कैप्टन को गिरफ्तार किया गया है, जिसने पूरी बिरादरी को हिलाकर रख दिया है।

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