नई दिल्ली: इंडोनेशिया में रविवार तड़के अनाक क्राकाटोआ ज्वालामुखी के अचानक फटने से हड़कंप मच गया. विस्फोट के बाद आसमान में राख के दो बड़े गुबार उठे, जिनमें से एक करीब 20 हजार फीट और दूसरा लगभग 50 हजार फीट की ऊंचाई तक पहुंच गया. राख के फैलने के खतरे को देखते हुए जकार्ता के सोएकार्नो-हट्टा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कई घंटे उड़ानों का संचालन रोकना पड़ा. हालांकि, अभी तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है.
यह ज्वालामुखी जावा और सुमात्रा द्वीपों के बीच सुंडा जलडमरूमध्य में स्थित है. भूवैज्ञानिक एजेंसी के मुताबिक, ज्वालामुखी में शुक्रवार से ही हलचल बढ़ी हुई थी. रविवार सुबह 3:53 बजे करीब 30 सेकंड तक विस्फोट हुआ. निगरानी कैमरों में ज्वालामुखी से निकलते लावे की चमक भी रिकॉर्ड हुई है. प्रशासन ने लोगों को सक्रिय क्रेटर से कम से कम तीन किलोमीटर दूर रहने की चेतावनी दी है.
50 हजार फीट तक पहुंचा राख का गुबार
विस्फोट के बाद निकली राख दो दिशाओं में फैल गई. करीब 20 हजार फीट ऊंचा पहला गुबार उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ा, जिससे जकार्ता, बैंटन और पश्चिमी जावा के कुछ हिस्सों पर असर पड़ा. दूसरा राख का गुबार लगभग 50 हजार फीट तक पहुंचा और पश्चिम तथा उत्तर-पश्चिम दिशा में फैलता गया. इसका प्रभाव बैंटन, लैंपुंग, बेंगकुलु, दक्षिणी सुंडा जलडमरूमध्य और सुमात्रा के पश्चिम में हिंद महासागर के कुछ हिस्सों तक देखा गया.
जकार्ता एयरपोर्ट पर उड़ानें रोकी गईं
राख के कारण विमान संचालन में खतरा बढ़ने पर सोएकार्नो-हट्टा एयरपोर्ट ने सुबह 5:30 बजे से 9:30 बजे तक उड़ानें अस्थायी रूप से बंद रखीं. इस दौरान यात्रियों को काफी परेशानी हुई. रविवार को कुल 209 फ्लाइट मूवमेंट प्रभावित हुए और करीब 22,800 यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा. घरेलू उड़ानों में मकासर जाने वाली सेवाएं प्रभावित हुईं. वहीं, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में सिंगापुर की फ्लाइट्स पर सबसे ज्यादा असर पड़ा. हांगकांग, सिडनी, एम्स्टर्डम, सियोल, दोहा और कुआलालंपुर की उड़ानें भी प्रभावित हुईं.
170 विमान एयरपोर्ट पर रुके
रात के समय एयरपोर्ट पर खड़े किए गए करीब 170 विमान वहीं मौजूद रहे. नागरिक उड्डयन विभाग एयरलाइंस, एयरपोर्ट संचालकों, नेविगेशन सेवाओं और मौसम विभाग के साथ हालात पर नजर रख रहा है. यात्रियों को एयरपोर्ट जाने से पहले अपनी एयरलाइन से फ्लाइट की स्थिति जांचने की सलाह दी गई है. अनाक क्राकाटोआ चेतावनी के चार स्तरों में दूसरे सबसे ऊंचे स्तर पर है. 2018 में इसके विस्फोट के बाद सुनामी आई थी, जिसमें जावा और सुमात्रा में कम से कम 430 लोगों की मौत हुई थी.











