नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े शुभचिंतकों के एक समूह ने अमेरिका में संगठन की गतिविधियों को विस्तार देने के लिए अमेरिकी न्याय विभाग में खुद को फॉरेन एजेंट के तौर पर रजिस्टर्ड कराया है। अमेरिकी कानून के तहत 27 अगस्त को किए गए इस रजिस्ट्रेशन में जॉर्जिया के पते पर रजिस्टर्ड ‘आरएसएस फ्रेंड्स’ नाम के समूह ने नई दिल्ली के केशवकुंज स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को अपना ‘फॉरेन प्रिंसिपल’ बताया है। यह रजिस्ट्रेशन अमेरिका के फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट (FARA) के तहत कराया गया है।
कोई लिखित करार नहीं, लेकिन संबंध से इनकार भी नहीं
रजिस्ट्रेशन से जुड़े दस्तावेजों में समूह ने साफ किया है कि उसका आरएसएस के साथ किसी तरह का कोई लिखित करार नहीं है। न तो कोई एम्प्लॉयमेंट एग्रीमेंट है, न कंसल्टिंग, लॉबिंग या पब्लिक रिलेशन से जुड़ा कोई अनुबंध। समूह को आरएसएस की तरफ से किसी तय काम, भुगतान या ऑपरेशनल निर्देश से जुड़ा कोई औपचारिक दस्तावेज नहीं मिला है।
हालांकि, समूह ने यह भी स्पष्ट किया है कि लिखित अनुबंध न होने का मतलब यह नहीं है कि दोनों के बीच कोई संबंध या समन्वय नहीं है। दस्तावेज में कहा गया है कि इस कमी को इस तरह नहीं देखा जाना चाहिए कि कोई रिक्वेस्ट, समझ, ऑथराइजेशन या दिशा-निर्देश मौजूद नहीं है। समूह ने भरोसा दिलाया है कि वह अपनी सभी गतिविधियों से जुड़े तथ्यों का पूरा खुलासा करेगा।
क्या करेगी आरएसएस फ्रेंड्स?
आरएसएस फ्रेंड्स ने अपने उद्देश्य को लेकर बताया है कि उसकी प्रस्तावित गतिविधियां मुख्य रूप से सूचनात्मक और शैक्षाणिक होंगी। इसके साथ ही वह पब्लिक रिलेशन और कम्युनिटी एंगेजमेंट पर भी काम करेगा। समूह के मुताबिक, वह अपने नियमों और अमेरिकी कानूनों के दायरे में रहकर आम जनता, पत्रकारों, मीडिया संस्थानों, रिसर्चर्स, अकादमिक और पॉलिसी संस्थानों, सामुदायिक नेताओं और सिविल सोसाइटी संगठनों से संवाद कर सकता है। जरूरत पड़ने पर वह सरकारी एजेंसियों और अधिकारियों से भी संपर्क करेगा।
आरएसएस को बताया स्वयंसेवी संगठन
दस्तावेज में आरएसएस को भारत में काम करने वाला एक स्वयंसेवी और सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन बताया गया है। इसमें कहा गया है कि आरएसएस व्यक्तियों और स्वैच्छिक संघों का एक गैर-पंजीकृत भारतीय निकाय है। जानकारी के अनुसार, आरएसएस फ्रेंड्स के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में तीन नाम शामिल हैं- राजेंद्र सोनरीकर, जयंत पंत और देवानंद गड्डम।












