अमेरिका में H-1B वीजा वालों को लेकर बड़ा बयान, जेडी वेंस ने बताया 'बंधुआ मजदूर', भारतीय आईटी पेशेवरों पर क्या पड़ेगा असर?

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नई दिल्ली: अमेरिका में H-1B वीजा पर काम करने वाले विदेशी कर्मचारियों को लेकर बहस तेज हो गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस वीजा के जरिए आने वाले कर्मचारियों की तुलना बंधुआ मजदूरों से की है। उनका आरोप है कि कुछ कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को कम वेतन पर रखकर अमेरिकी लोगों की नौकरियों को प्रभावित कर रही हैं। इस बयान से भारतीय आईटी पेशेवरों के बीच भी चिंता बढ़ सकती है, क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय इस वीजा के जरिए अमेरिका में काम करते हैं।

H-1B कर्मचारियों की सैलरी पर क्या बोले वेंस?

जेडी वेंस ने दावा किया कि H-1B वीजा पर काम करने वाले कर्मचारियों को समान पद पर काम करने वाले अमेरिकी नागरिकों से कम वेतन मिलता है। उनके मुताबिक, कुछ मामलों में यह अंतर सालाना 20,000 डॉलर तक हो सकता है। वहीं, विदेशी आउटसोर्सिंग कंपनियों के जरिए आने वाले कर्मचारियों के मामले में उन्होंने 48,000 डॉलर तक के अंतर का दावा किया।

वेंस का कहना है कि कुछ कंपनियां कम लागत पर कर्मचारी रखकर अपना मुनाफा बढ़ाती हैं और अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी करती हैं। हालांकि, उनके बयान में दिए गए वेतन के आंकड़ों को सभी H-1B कर्मचारियों पर लागू नहीं माना जा सकता।

क्या है H-1B वीजा और भारतीयों को क्यों मिलता है?

H-1B अमेरिका का एक गैर-आप्रवासी वर्क वीजा है। इसके तहत अमेरिकी कंपनियां विशेष कौशल और उच्च शिक्षा की जरूरत वाले पदों पर योग्य विदेशी पेशेवरों को नियुक्त कर सकती हैं। भारतीय इंजीनियर, सॉफ्टवेयर डेवलपर, आईटी विशेषज्ञ और अन्य कुशल पेशेवर इस वीजा के जरिए अमेरिका में काम करने जाते हैं। भारतीय कर्मचारियों के लिए यह अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों में नौकरी पाने का एक महत्वपूर्ण रास्ता रहा है। हालांकि, वीजा मिलने के लिए निर्धारित नियमों और पात्रता शर्तों को पूरा करना जरूरी है।

इसी बीच, अमेरिकी प्रशासन ने आठ कंपनियों को स्थायी श्रम प्रमाणन यानी PERM कार्यक्रम से निलंबित करने की घोषणा की है। इनमें कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टाटा, विप्रो, एचसीएल, कैपजेमिनी, माइक्रोसॉफ्ट और एडोबी शामिल हैं।अमेरिकी श्रम विभाग का आरोप है कि विदेशी कर्मचारियों से जुड़े कार्यक्रमों के इस्तेमाल से अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार पर असर पड़ा है। विभाग ने कहा है कि संबंधित कंपनियों के नए और लंबित PERM आवेदनों पर कार्रवाई प्रभावित होगी।

भारतीय पेशेवरों पर क्या होगा असर?

इस कार्रवाई से संबंधित कंपनियों में ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश कर रहे कर्मचारियों को परेशानी हो सकती है। हालांकि, PERM पर रोक का मतलब यह नहीं है कि सभी भारतीयों के H-1B वीजा अपने आप रद्द हो जाएंगे। आगे का असर संबंधित आवेदन और अमेरिकी नियमों पर निर्भर करेगा।

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