नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में बीमा पॉलिसी को अपग्रेड कराने और आकर्षक लाभ दिलाने के नाम पर लोगों को चूना लगाने वाले कथित साइबर ठगी गिरोह का पश्चिमी जिला पुलिस ने पर्दाफाश किया है। जनकपुरी में दूसरे तल पर चल रहे इस कथित फर्जी कॉल सेंटर पर पुलिस ने छापेमारी कर 43 लोगों को पकड़ा। इनमें 32 महिलाएं और 11 पुरुष शामिल हैं। पुलिस ने गिरोह के मालिक समेत पांच प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि अन्य 38 लोग कॉल सेंटर में टेली कॉलर के रूप में काम कर रहे थे।
दिल्ली पुलिस मुख्यालय में प्रेस वार्ता के दौरान वेस्ट जिला डीसीपी हरेश्वर वी स्वामी ने बताया कि 4 नवंबर को ए-3/11 जनकपुरी में बीमा पॉलिसी के नाम पर साइबर ठगी का कॉल सेंटर चलने की गुप्त सूचना मिली थी। इसके बाद एसीपी ऑपरेशंस राजेश कुमार के नेतृत्व और डीसीपी पश्चिमी जिला हरेश्वर वी. स्वामी की निगरानी में विशेष टीम गठित की गई। इंस्पेक्टर अमित धानी के नेतृत्व में टीम ने मौके पर दबिश दी तो वहां बाकायदा वर्कस्टेशन बनाकर लोगों को फोन किए जा रहे थे।
बीमा कंपनी का अधिकारी बनकर बिछाते थे ठगी का जाल
जांच में सामने आया कि कॉल सेंटर के कर्मचारी पीएनबी मेटलाइफ, एसबीआई इंश्योरेंस, आईसीआईसीआई लोम्बार्ड और भारती एक्सा जैसी बीमा कंपनियों का प्रतिनिधि बनकर पॉलिसीधारकों को फोन करते थे। उन्हें पॉलिसी अपग्रेड, अतिरिक्त लाभ और आकर्षक योजनाओं का लालच दिया जाता था। पुलिस के अनुसार, मालिक विशाल कपूर कथित तौर पर ग्राहकों का निजी डेटा उपलब्ध कराता था। टेली कॉलर ग्राहकों को फंसाकर उनकी जानकारी प्रबंधकीय कर्मचारियों के माध्यम से मालिक तक पहुंचाते थे। इसके बाद बैंक खातों के जरिए रकम मंगाने की व्यवस्था की जाती थी।
कॉल सेंटर से मिला ठगी का पूरा सामान
छापेमारी में पुलिस ने दो लाख रुपये नकद, एक एचपी लैपटॉप, 40 कीपैड और आठ स्मार्टफोन सहित 48 मोबाइल फोन, 38 सिम कार्ड, ग्राहकों की जानकारी वाले 619 पन्ने, 67 रजिस्टर और 38 कंपनी पहचान पत्र बरामद किए। इसके अलावा 22 डेबिट, क्रेडिट और पेमेंट कार्ड भी मिले। मालिक के मोबाइल में मिले दो बैंक खातों का संबंध एनसीआरपी पर दर्ज पांच साइबर अपराध शिकायतों से सामने आया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विशाल कपूर (मालिक), नितिन शर्मा (प्रशासनिक कर्मचारी), गुंजन (एचआर मैनेजर), अजय (असिस्टेंट मैनेजर) और भीम (मैनेजर) के रूप में हुई है। पुलिस ने जनकपुरी थाने में एफआईआर नंबर 450/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 318(4), 61(2) और 3(5) में मामला दर्ज किया है।
पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार, विशेष पुलिस आयुक्त नीरज ठाकुर और संयुक्त पुलिस आयुक्त सुमन गोयल ने टीम की कार्रवाई की सराहना की है। पुलिस अब बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच कर रही है, ताकि डेटा के स्रोत, प्रभावित पॉलिसीधारकों और ठगी की रकम का पूरा नेटवर्क सामने आ सके।
पुलिस अब बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच कर रही है ताकि डेटा के स्रोत, प्रभावित पॉलिसीधारकों और ठगी की रकम का पूरा नेटवर्क सामने आ सके।
Reported By: Pankaj Rai












