नई दिल्ली: न वर्दी का खौफ काम आया न गिरफ्तारी की धमकी! दिल्ली पुलिस की आईएफएसओ यूनिट ने साइबर ठगों के उस खतरनाक जाल पर करारा प्रहार किया है जिसमें बुजुर्गों को वीडियो कॉल पर डिजिटल गिरफ्तारी का डर दिखाकर उनकी जीवनभर की कमाई लूटी जा रही थी। पुलिस की सक्रियता सूझबूझ और लगातार समझाइश से दिल्ली समेत पांच राज्यों में पांच मामलों में करीब 1 करोड़ 53 लाख 48 हजार रुपये की संभावित अतिरिक्त ठगी रोक दी गई। इस कार्रवाई में दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात के पीड़ितों को राहत मिली।
संदिग्ध बैंक ट्रांजेक्शन ट्रैक कर साइबर ठगी की साजिश की नाकाम
दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (आईएफएसओ) यूनिट की वित्तीय निगरानी शाखा के अंतर्गत सक्रिय पीड़ितों की पहचान एवं सुरक्षा करने वाली विशेष टीम ने शिकायत का इंतजार करने के बजाय संदिग्ध बैंक लेन-देन की कड़ियां जोड़कर पीड़ितों तक खुद पहुंच बनाई। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त आईएफएसओ संजय भाटिया की निगरानी में तथा पुलिस उपायुक्त अन्वेश रॉय के नेतृत्व में टीम ने बैंक अधिकारियों राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 और संबंधित राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय कर ठगी के अगले वार को नाकाम किया।
14 दिन तक डिजिटल कैद में रहा 77 वर्षीय बुजुर्ग
दिल्ली के नजफगढ़ निवासी 77 वर्षीय सेवानिवृत्त भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण कर्मचारी को ठगों ने 17 सितंबर से डिजिटल गिरफ्तारी के भय में रखा था। उनसे 25 लाख रुपये पहले ही ऐंठे जा चुके थे। पत्नी के साथ घर में रह रहे बुजुर्ग को विश्वास था कि वीडियो कॉल पर बात करने वाले असली पुलिस अधिकारी हैं। ठग अब तीन लाख रुपये और मांग रहे थे तथा सोना-चांदी गिरवी रखने का दबाव बना रहे थे। टीम ने धैर्यपूर्वक समझाया, व्हाट्सऐप पर जागरूकता वीडियो भेजे और हेल्पलाइन 1930 के माध्यम से अपनी पहचान सत्यापित करने का भरोसा दिया। बैंक से लेन-देन का विवरण जुटाकर शिकायत दर्ज कराने में सहायता की गई। द्वारका साइबर पुलिस थाने के अधिकारी के घर पहुंचने पर बुजुर्ग का विश्वास मजबूत हुआ और डिजिटल गिरफ्तारी का भय टूटा। पुलिस ने करीब 3.48 लाख रुपये की अतिरिक्त संभावित ठगी रोक दी।
राजस्थान में मकान गिरवी कराने की साजिश नाकाम
राजस्थान के 80 वर्षीय कपड़ा व्यापारी से ठग 18 लाख रुपये ले चुके थे। बेटे की मृत्यु के बाद पत्नी के साथ रह रहे बुजुर्ग से अब 10 लाख रुपये और मांगे जा रहे थे। ठग उन्हें मकान गिरवी रखने के लिए दबाव डाल रहे थे। आईएफएसओ टीम ने राजस्थान की साइबर हेल्पलाइन से संपर्क कराकर शिकायत दर्ज कराने में मदद की और 10 लाख रुपये की संभावित ठगी रोक दी।
यूपी के दंपती को बचाया, महाराष्ट्र में 55 लाख सुरक्षित
उत्तर प्रदेश में सेवानिवृत्त नर्स और उनके करीब 70 वर्षीय रेलवे कर्मचारी पति को आतंकवादी घटना से जुड़े मामले में फंसाने की धमकी देकर लगभग 52 लाख रुपये ठगे जा चुके थे। ठग उनकी 10 लाख रुपये की सावधि जमा राशि तुड़वाना चाहते थे। टीम की समय पर मदद से यह रकम बच गई। महाराष्ट्र में 65 वर्षीय अस्पताल सहायक से करीब 85 लाख रुपये ऐंठे जा चुके थे। अब ठग बेटी और दामाद के नाम की सावधि जमा से कुल 55 लाख रुपये स्थानांतरित कराने का दबाव बना रहे थे। टीम ने महाराष्ट्र की साइबर हेल्पलाइन के माध्यम से शिकायत दर्ज कराने में सहायता की और परिवार की बचत सुरक्षित कराई।
गुजरात में निवेश के नाम पर 75 लाख रुपये बचाए
गुजरात के 50 वर्षीय कारोबारी ने निवेश के नाम पर 25 लाख रुपये संदिग्ध खाते में भेजे थे। वह करीब एक करोड़ रुपये निवेश करने की योजना बना रहे थे। आईएफएसओ टीम की लगातार निगरानी और दोबारा संपर्क करने से उन्हें ठगी का अहसास हुआ। आगे रकम भेजने से रुकने पर करीब 75 लाख रुपये की संभावित चपत बच गई।
पुलिस की अपील—डरें नहीं, तुरंत शिकायत करें
दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कानून में ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ जैसी कोई प्रक्रिया नहीं है। कोई भी पुलिस अधिकारी, सीबीआई, एनआईए, ट्राई, आरबीआई या अदालत का अधिकारी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी का भय दिखाकर पैसे जमा कराने अथवा खाते में रकम सत्यापन के नाम पर स्थानांतरित करने को नहीं कहता। ऐसी कॉल आने पर घबराएं नहीं, पैसे न भेजें और ओटीपी या बैंक संबंधी जानकारी साझा न करें। तत्काल राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। समय पर सूचना देना ठगी की रकम रोकने में निर्णायक साबित हो सकता है। डीसीपी अन्वेश रॉय की अपील डिजिटल गिरफ्तारी के नाम पर डराना है साइबर ठगों का हथियार जागरूकता और समय पर शिकायत से सुरक्षित रहेगा आपका परिवार और जीवनभर की कमाई
Reported By: Pankaj Rai












