नोटों की नकली फैक्ट्री का पर्दाफाश, 18.23 लाख रुपये के नकली नोट बरामद, चार आरोपी गिरफ्तार

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नई दिल्ली: राजधानी में नकली करेंसी के सहारे काले कारोबार को चमकाने की कोशिश कर रहे गिरोह पर पश्चिमी जिला पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स स्क्वाड ने बड़ा शिकंजा कसा है। जनकपुरी में संदिग्ध हालत में पकड़े गए एक युवक से शुरू हुई जांच पुलिस को पटेल नगर के बलजीत नगर स्थित उस कमरे तक ले गई, जहां कथित तौर पर नकली नोट तैयार करने का पूरा खेल चल रहा था। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर कुल 18 लाख 23 हजार 800 रुपये अंकित मूल्य की नकली करेंसी तैयार और अधबने नोट तथा नोट छापने और तैयार करने का सामान बरामद किया है।

दिल्ली पुलिस मुख्यालय में प्रेस वार्ता के दौरान ज्वाइंट सीपी वेस्टर्न रेंज सुमन गोयल ने बताया कि हेड कांस्टेबल प्रवीण और हेड कांस्टेबल विनोद जनकपुरी के सी-2सी ब्लॉक स्थित गेट नंबर-2 के पास गश्त कर रहे थे। इसी दौरान पुलिस को देखकर एक संदिग्ध युवक भागने लगा। पुलिसकर्मियों ने पीछा कर उसे दबोच लिया। पूछताछ में उसकी पहचान 25 वर्षीय अंकित कुमार, निवासी जनकपुरी के रूप में हुई। तलाशी लेने पर उसके पास से 500 रुपये के 250 नकली नोट, यानी कुल 1 लाख 25 हजार रुपये अंकित मूल्य की नकली करेंसी बरामद हुई। मौके पर एफएसएल विशेषज्ञ ने नोटों की जांच कर उन्हें नकली पाया।इसके बाद जनकपुरी थाने में एफआईआर संख्या 409/2026, दिनांक 2 अक्टूबर 2026 को संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।

पूछताछ ने खोला नकली नोटों के कारखाने का राज

मामले की गंभीरता को देखते हुए एंटी-नारकोटिक्स स्क्वाड की विशेष टीम गठित की गई। पूछताछ में अंकित ने कथित तौर पर खुलासा किया कि उसे नकली नोट गगनदीप सिंह उर्फ मन्नी और कुलवंत सिंह उर्फ काके, दोनों निवासी पटेल नगर से मिले थे और वह इन्हें आगे पहुंचाने की तैयारी में था।

पुलिस टीम ने सूचना पर कार्रवाई करते हुए 2 अक्टूबर को बलजीत नगर पटेल नगर से गगनदीप सिंह उर्फ मन्नी और कुलवंत सिंह उर्फ काके को पकड़ लिया। दोनों की निशानदेही पर हनुमान मंदिर के पास गली नंबर-21 स्थित मकान के प्रथम तल पर किराए के कमरे की तलाशी ली गई।तलाशी के दौरान पुलिस के हाथ नकली नोटों का कथित पूरा सेटअप लगा। यहां से 16 लाख 98 हजार 800 रुपये अंकित मूल्य के तैयार और अधबने नकली नोट बरामद हुए। इसके अलावा नकली करेंसी तैयार करने में इस्तेमाल होने वाला लैपटॉप, हार्ड डिस्क और बड़ी मात्रा में छपाई व प्रसंस्करण का सामान भी जब्त किया गया।

मकान मालिक भी जांच के घेरे में आया

जांच आगे बढ़ी तो पुलिस ने मकान मालिक 34 वर्षीय अमित को भी हिरासत में लिया। पुलिस के मुताबिक, जांच में सामने आया कि उसे कमरे में चल रही गतिविधियों की जानकारी थी और बाद में वह कथित तौर पर इस पूरे काम में शामिल हो गया। इसके बाद उसे भी मामले में गिरफ्तार कर लिया गया।

ऐसे चलता था नकली नोटों का खेल

पुलिस के अनुसार गगनदीप को प्रिंटिंग प्रेस में काम करने और डाई-कटिंग मशीन चलाने का अनुभव था। वहीं कुलवंत को ग्राफिक डिजाइनिंग और फोटोशॉप की जानकारी थी। दोनों ने कथित तौर पर अपने अनुभव को एक साथ जोड़कर नकली करेंसी तैयार करने का इंतजाम किया।

बताया गया है कि आरोपियों ने इंटरनेट पर उपलब्ध वीडियो और ट्यूटोरियल के जरिए नकली नोटों की छपाई और प्रोसेसिंग की तकनीक सीखने का प्रयास किया। इसके बाद किराए के कमरे में प्रिंटिंग उपकरण और अन्य सामग्री जुटाकर काम शुरू किया गया। पुलिस के मुताबिक अमित ने कमरे की व्यवस्था की, जबकि अंकित कथित तौर पर नकली नोटों को आगे सप्लाई करने का काम कर रहा था।

किसके पास क्या भूमिका?

पुलिस के मुताबिक अंकित कुमार ने 12वीं तक पढ़ाई की है और पार्किंग कर्मचारी के रूप में काम करता था। उस पर आरोप है कि उसने गगनदीप से करीब 2.50 लाख रुपये अंकित मूल्य के नकली 500 रुपये के नोट 50 हजार रुपये में खरीदे थे। गगनदीप सिंह उर्फ मन्नी पहले अपने मामा की प्रिंटिंग प्रेस में काम कर चुका था, जहां उसे प्रिंटिंग और डाई-कटिंग मशीनों का अनुभव मिला। पुलिस के अनुसार, ऑनलाइन गेमिंग में कथित आर्थिक नुकसान के बाद उसने कुलवंत के साथ मिलकर नकली करेंसी तैयार करने का काम शुरू किया।

कुलवंत सिंह उर्फ काके नौवीं कक्षा तक पढ़ा है। वह पहले मोबाइल फोन की दुकान चलाने और सिम कार्ड डीलर के रूप में काम कर चुका है। उसे ग्राफिक डिजाइनिंग और फोटोशॉप का ज्ञान बताया गया है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, वह वर्ष 2012 में फर्जी दस्तावेजों के जरिए सिम कार्ड जारी करने के मामले में गिरफ्तार हो चुका है।

अमित दसवीं कक्षा तक पढ़ा है। पुलिस के अनुसार, उसने जुलाई 2026 में गगनदीप और कुलवंत को तीन हजार रुपये प्रतिमाह किराए पर कमरा दिया था और बाद में कथित तौर पर नकली करेंसी तैयार करने के काम में शामिल हो गया।

नकली नोटों के साथ पूरी ‘फैक्ट्री’ का सामान बरामद

पुलिस ने कुल 18 लाख 23 हजार 800 रुपये अंकित मूल्य की नकली करेंसी बरामद की है। इसमें अंकित के पास से मिले 1.25 लाख रुपये तथा किराए के कमरे से बरामद 16.98 लाख रुपये के तैयार और अधबने नोट शामिल हैं। इसके अलावा पुलिस ने लैपटॉप, हार्ड डिस्क, स्क्रीन प्रिंटिंग फ्रेम, वॉटरमार्क डाई, कॉटन फाइबर शीट, सिक्योरिटी थ्रेड सामग्री, हीट लेमिनेटिंग मशीन, रंगीन प्रिंटर, प्रिंटिंग इंक, स्टेपर, कटर और अन्य उपकरण बरामद किए हैं।

Image Courtesy/ Pankaj Rai
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स्रोत से सप्लाई तक पूरी कड़ी खंगाल रही पुलिस

पश्चिमी जिला पुलिस अब इस नेटवर्क की पूरी सप्लाई चेन खंगाल रही है। जांच का फोकस नकली करेंसी के स्रोत, इसके लिए कच्चा माल और मशीनरी उपलब्ध कराने वालों, तैयार नोटों के भंडारण तथा उन्हें आगे पहुंचाने वाले लोगों तक पहुंचने पर है। इस कार्रवाई की निगरानी डीसीपी पश्चिम जिला हरेश्वर वी. स्वामी के समग्र पर्यवेक्षण में की गई। ऑपरेशन में एंटी-नारकोटिक्स स्क्वाड के प्रभारी इंस्पेक्टर अमित धानी, एसीपी ऑपरेशंस राजेश कुमार के नेतृत्व में एसआई संदीप दलाल, एसआई दीपक महला, एसआई चंद्र शेखर, हेड कांस्टेबल विनोद, प्रवीण, अनिल, विकास तथा कांस्टेबल अंकित, दीपक और विकास की टीम शामिल रही।

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