मौत के बाद भी जिंदा होने की उम्मीद! संजोकर रखा 4 साल पहले मर चुके शख्स का शव, क्रायोनिक्स से जुड़ा अनोखा केस

0
13

नई दिल्ली: कल्पना कीजिए, एक शख्स चार साल पहले इस दुनिया से जा चुका है, लेकिन उसका परिवार अब भी उम्मीद लगाए बैठा है कि विज्ञान एक दिन उसे वापस जिंदा कर देगा। मुंबई में सामने आया यह मामला किसी विज्ञान-कथा फिल्म की कहानी जैसा लगता है, लेकिन यह हकीकत है। पुलिस को मलाड के एक स्थानीय क्लिनिक से 80 साल के एक व्यक्ति का शव बरामद हुआ है, जो चार साल पहले मृत घोषित किया जा चुका था।

पुलिस को यह जानकारी एक मुखबिर के जरिए मिली, जिसके बाद टीम मलाड के इस क्लिनिक तक पहुंची। जांच में पता चला कि मृतक के परिवार ने उसकी मौत के बाद शरीर को संरक्षित रखने का निर्देश दिया था। परिवार का कहना था कि वे बेहद परेशान थे और शव को अमेरिका स्थित एक क्रायोनिक्स सेंटर भेजना चाहते थे, जहां लंबे समय तक शरीर को सुरक्षित रखने की सुविधा मिलती है।

आखिर क्या है क्रायोनिक्स

क्रायोनिक्स एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें मृत्यु के बाद इंसानी शरीर को बेहद कम तापमान पर सुरक्षित रखा जाता है, इस उम्मीद के साथ कि भविष्य में चिकित्सा विज्ञान इतना विकसित हो जाएगा कि मृतक को दोबारा जिंदा किया जा सके। हालांकि कोशिकाओं और ऊतकों को इस तरह संरक्षित करना एक स्थापित वैज्ञानिक प्रक्रिया है, लेकिन पूरे इंसानी शरीर के साथ ऐसा करना अभी भी प्रयोगात्मक स्तर पर ही है।

भारत में इसे लेकर क्या कहता है कानून

दिलचस्प बात यह है कि भारत में क्रायोनिक्स को लेकर कोई सीधा कानून मौजूद नहीं है, न इसे प्रतिबंधित किया गया है और न ही इसकी खुली इजाजत दी गई है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी स्पष्ट किया है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गरिमा का अधिकार मृतकों पर भी लागू होता है, जिसके तहत शव का सम्मानजनक अंतिम संस्कार जरूरी माना जाता है। कुछ कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह अधिकार क्रायोप्रिजर्वेशन जैसे स्वैच्छिक विकल्प तक भी फैल सकता है, लेकिन अभी इसे औपचारिक मान्यता नहीं मिली है।

गौरतलब है कि 2014 में भी एक ऐसा ही मामला सुर्खियों में रहा था, जब आध्यात्मिक गुरु आशुतोष महाराज को चिकित्सकीय रूप से मृत घोषित किया गया था। उस समय पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने उनके अनुयायियों को उनका शरीर व्यावसायिक फ्रीजर में रखने की अनुमति दी थी, क्योंकि अनुयायियों का दावा था कि गुरु गहरी समाधि अवस्था में हैं। हालांकि अदालत ने यह फैसला धार्मिक स्वतंत्रता के आधार पर दिया था, न कि क्रायोनिक्स को वैधता देने के लिए।

बिना सूचना के शव रखना बन सकता है मुसीबत

कानूनी जानकारों के मुताबिक, अगर किसी की मृत्यु को छुपाने या पेंशन जैसे वित्तीय लाभ के लिए धोखाधड़ी करने के इरादे से शव को गुप्त रूप से संरक्षित रखा जाए, तो यह गंभीर आपराधिक मामला बन सकता है। फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले में कानूनी सलाह ले रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस तरह शव को कब तक रखा जा सकता है। मृतक के अंतिम संस्कार को लेकर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here