सीमा पर शांति के बिना चीन से रिश्ते मजबूत नहीं, जयशंकर ने भारत का रुख स्पष्ट किया

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भारत और चीन के रिश्तों को लेकर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट संकेत दिया है कि दोनों पड़ोसी देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की कोशिशें सीमा की स्थिति से अलग नहीं की जा सकतीं। उनका कहना है कि वास्तविक सामान्य संबंधों की बुनियाद सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता है। यदि वहां तनाव बढ़ता है या हालात बिगड़ते हैं, तो उसका असर दोनों देशों के व्यापक रिश्तों पर पड़ना स्वाभाविक है। जयशंकर ने यह भी रेखांकित किया कि सीमा विवाद अचानक पैदा हुआ कोई नया सवाल नहीं, बल्कि लंबे समय से दोनों देशों के सामने मौजूद चुनौती है। पिछले वर्षों में सीमा पर हुई घटनाओं ने इस मुद्दे को और संवेदनशील बना दिया है।

दशकों पुराना विवाद, रिश्तों की बड़ी परीक्षा

जयशंकर के मुताबिक भारत और चीन के बीच सीमा का निर्धारण अब तक पूरी तरह नहीं हो पाया है। यह विवाद कई दशकों से चला आ रहा है, लेकिन लंबे समय तक सीमा पर अपेक्षाकृत शांत स्थिति बनी रही थी। उन्होंने 1975 से 2020 के बीच के दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि इन 45 वर्षों में सीमा पर सैनिकों की मौत की घटना नहीं हुई थी। इस अवधि में दोनों देशों के संबंधों में भी कई स्तरों पर प्रगति देखने को मिली। हालांकि, सीमा की अनिश्चितता पूरी तरह समाप्त नहीं हुई और यह द्विपक्षीय संबंधों के लिए लगातार एक अहम विषय बनी रही।

2020 की घटना ने बदल दिया माहौल

विदेश मंत्री ने बताया कि वर्ष 2020 में सीमा पर परिस्थितियां गंभीर रूप से बदल गईं। उस समय भारत कोविड महामारी और लॉकडाउन की मुश्किलों से गुजर रहा था, तभी सीमावर्ती क्षेत्रों में कई समस्याएं सामने आईं। तनाव बढ़ने के बाद सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई, जिसमें दोनों तरफ के जवानों की जान गई। जयशंकर ने इस घटनाक्रम को पहले के दशकों की स्थिति से बड़ा बदलाव बताया। इस घटना ने दोनों देशों के बीच भरोसे को झटका दिया और सीमा पर तनाव का प्रभाव राजनीतिक तथा कूटनीतिक संबंधों पर भी दिखाई देने लगा।

सीमा पर तनाव का असर व्यापक संबंधों पर

जयशंकर ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बिगड़ने की कीमत द्विपक्षीय संबंधों को चुकानी पड़ती है। उनके अनुसार, सीमा पर सामान्य स्थिति लौटाने के लिए लंबी बातचीत और प्रयास करने पड़े। तनाव के बाद के वर्षों में इसका असर दोनों देशों के रिश्तों में साफ नजर आया। भारत का संदेश यह है कि आर्थिक, राजनीतिक और अन्य क्षेत्रों में संबंध आगे बढ़ाने की इच्छा तभी सार्थक हो सकती है, जब सीमा पर भरोसेमंद और शांत माहौल कायम रहे। केवल बातचीत या कूटनीतिक संपर्क से रिश्तों को पूरी तरह सामान्य नहीं माना जा सकता।

2024 के बाद सुधार, लेकिन शांति जरूरी

विदेश मंत्री के बयान के अनुसार, 2024 के बाद भारत और चीन के संबंधों में काफी हद तक सुधार आया है। सीमावर्ती क्षेत्रों में परिस्थितियों के सामान्य होने से दोनों देशों के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने की गुंजाइश बनी है। हालांकि, भारत की प्राथमिकता स्पष्ट है: सीमा पर स्थिरता बनी रहनी चाहिए। जयशंकर का रुख बताता है कि भारत चीन के साथ सामान्य संबंधों के खिलाफ नहीं है, लेकिन इसके लिए सीमा पर शांति को अनिवार्य मानता है। आने वाले समय में रिश्तों की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों देश सीमावर्ती इलाकों में स्थिरता बनाए रखने और लंबित मतभेदों को संभालने में कितने सफल होते हैं।

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