नई दिल्ली: शरीर की रोगों से रक्षा करने वाली प्रतिरक्षा प्रणाली जब अपने ही शरीर के खिलाफ जंग छेड़ देती है, तो ऑटोइम्यून बीमारियां जन्म लेती हैं। अब इन बीमारियों के पीछे छिपे आनुवंशिक और प्रतिरक्षात्मक रहस्यों को उजागर करने के लिए देशव्यापी वैज्ञानिक अभियान शुरू किया जा रहा है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने ‘जीनोमिक प्रोफाइलिंग एंड आइडेंटिफिकेशन ऑफ टार्गेटेबल शेयर्ड इम्यूनोपैथोजेनिक इवेंट्स इन मल्टीप्लेक्स फैमिलीज विद ऑटोइम्यून डिजीजेज’ नामक महत्वपूर्ण शोध परियोजना अशोका विश्वविद्यालय सोनीपत के परियोजना समन्वयक डॉ. दिप्यमान गांगुली को प्रदान की है।
इस चार वर्षीय परियोजना का लक्ष्य ऐसे 200 परिवारों का राष्ट्रीय समूह तैयार करना है जिनमें एक से अधिक सदस्य ऑटोइम्यून बीमारियों से प्रभावित हैं। प्रत्येक चयनित परिवार में कम से कम एक सदस्य का सिस्टमिक ल्यूपस एरिथेमेटोसस (एसएलई) यानी ल्यूपस से पीड़ित होना अनिवार्य होगा। शोध के अनुसार, परिवार में किसी सदस्य को ऑटोइम्यून बीमारी होने पर अन्य सदस्यों में इसका जोखिम लगभग दोगुना हो सकता है।
इस महाअभियान में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) नई दिल्ली एवं बिबिनगर एसजीपीजीआईएमएस लखनऊ, सेंट जॉन्स अस्पताल बेंगलुरु, निजाम्स इंस्टीट्यूट हैदराबाद और मेडिकल कॉलेज कोलकाता सहित छह चिकित्सा संस्थान भागीदारी करेंगे। चयनित मरीजों और उनके परिजनों के रक्त नमूनों, आनुवंशिक संरचना तथा प्रतिरक्षा प्रणाली की विस्तृत जांच की जाएगी। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इस अध्ययन से बीमारी पैदा करने वाले साझा जैविक कारणों की पहचान होगी और भविष्य में नई, अधिक प्रभावी तथा लक्षित दवाओं के विकास का रास्ता खुलेगा।
दिल्ली-एनसीआर के ल्यूपस मरीजों से अपील
एम्स दिल्ली में जांच और पंजीकरण के लिए इच्छुक मरीज रूमेटोलॉजी विभाग के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. रंजन गुप्ता से संपर्क कर सकते हैं। ई-मेल: dr.guptaranjan@aiims.edu फोन/व्हाट्सऐप: 7303061991विशेष संदेश, बीमारी की जड़ों तक पहुंचेगा विज्ञान परिवारों की भागीदारी से खुलेगा इलाज का नया आसमान।












