योगी सरकार के 8 नए मंत्रियों में बंटे विभाग, जानें किसे क्या मिला

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लखनऊ: योगी सरकार के हालिया मंत्रिमंडल विस्तार के आठ दिन बाद आखिरकार नए मंत्रियों के विभागों का बंटवारा कर दिया गया. राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की मंजूरी मिलने के बाद रविवार को विभाग आवंटन की आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई. इसके साथ ही लंबे समय से चल रही अटकलों पर विराम लग गया.

भूपेंद्र चौधरी को कौन सा विभाग मिला?

नए विभागों के आवंटन में कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र चौधरी को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विभाग सौंपा गया है, जबकि मनोज पांडेय को खाद्य एवं रसद व नागरिक आपूर्ति विभाग की जिम्मेदारी दी गई है. इससे पहले एमएसएमई विभाग राकेश सचान के पास था, लेकिन अब उनके जिम्मे केवल खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग, हथकरघा और वस्त्रोद्योग विभाग रह गए हैं.

राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार के तहत अजीत सिंह पाल को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग दिया गया है. वहीं सोमेंद्र तोमर को राजनीतिक पेंशन, सैनिक कल्याण और प्रांतीय रक्षक दल का कार्यभार सौंपा गया है. खास बात यह है कि ये विभाग पहले सीधे मुख्यमंत्री के पास थे. इसके अलावा कृष्णा पासवान को पशुधन एवं दुग्ध विकास, कैलाश सिंह राजपूत को ऊर्जा और अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत, सुरेंद्र दिलेर को राजस्व व हंस राज विश्वकर्मा को एमएसएमई विभाग में जिम्मेदारी दी गई है.

ओम प्रकाश राजभर के पास कौन सा विभाग? 

भूपेंद्र चौधरी इससे पहले पंचायती राज विभाग संभाल चुके हैं. हालांकि उन्हें भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद यह विभाग मुख्यमंत्री के अधीन चला गया था. वर्तमान में पंचायती राज विभाग सहयोगी दल सुभासपा के नेता ओम प्रकाश राजभर के पास है. वहीं अजीत पाल पहले विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी विभागों में कार्य कर रहे थे.

विभागों के आवंटन में हो रही देरी को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर निशाना साध रहा था. अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सरकार पर तंज कसा था. अब विभागों की घोषणा के बाद राजनीतिक चर्चाओं का दौर भी थम गया है.

इधर, मंत्रिमंडल विस्तार के बाद सोमवार को योगी सरकार 2.0 की पहली कैबिनेट बैठक भी होने जा रही है. मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित इस बैठक में एक दर्जन से ज्यादा अहम प्रस्तावों पर चर्चा और मंजूरी की संभावना है. इनमें पंचायत चुनावों में पिछड़ा वर्ग आरक्षण तय करने के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन का प्रस्ताव भी शामिल बताया जा रहा है.

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