UP में वोट कटने से बदली रणनीति! SIR के आंकड़ों ने बढ़ाई सभी दलों की टेंशन

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उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जिसने सभी दलों की चिंता बढ़ा दी है. एसआईआर प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं. इन आंकड़ों ने न केवल चुनावी समीकरण बदलने के संकेत दिए हैं, बल्कि नेताओं के लिए भी नई चुनौती खड़ी कर दी है. राज्यभर में कुल 2.04 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं. औसतन हर विधानसभा सीट पर करीब 13.24 फीसदी वोट कम हुए हैं. यह गिरावट सामान्य नहीं मानी जा रही है, क्योंकि इसका असर सीधे चुनाव परिणामों पर पड़ सकता है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्वाचन क्षेत्र गोरखपुर शहर में सबसे कम 33,094 वोट घटे हैं. यह उन चुनिंदा शहरी सीटों में शामिल है, जहां गिरावट काफी कम रही. इसके विपरीत, डिप्टी सीएम बृजेश पाठक की लखनऊ कैंट सीट पर सबसे ज्यादा असर देखने को मिला, जहां 1.47 लाख वोट कम हो गए.

बीजेपी और एसपी के बीच अंतर

विश्लेषण से यह भी साफ हुआ है कि भारतीय जनता पार्टी की तुलना में समाजवादी पार्टी की सीटों पर कम वोट कटे हैं. बीजेपी की शहरी सीटों पर औसतन 18.11 फीसदी वोट घटे, जबकि एसपी की शहरी सीटों पर यह आंकड़ा 16.36 फीसदी रहा. ग्रामीण इलाकों में दोनों दलों के बीच यह अंतर बहुत कम, लगभग एक फीसदी के आसपास है.

बड़े नेताओं की सीटों पर असर

कई बड़े नेताओं की सीटों पर वोटों में भारी कमी ने चिंता बढ़ा दी है. लखनऊ की सरोजिनी नगर सीट से राजेश्वर सिंह 56 हजार वोटों से जीते थे, लेकिन यहां 1.42 लाख वोट कम हो गए. विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना की सीट पर 90 हजार वोट घटे, जबकि उनकी जीत का अंतर 82 हजार था.

कुंडा में राजा भैया की सीट पर 55 हजार वोट कम हुए, जबकि उनका जीत का मार्जिन केवल 30 हजार था. रायबरेली में अदिति सिंह की सीट पर भी 56 हजार वोट कम हो गए हैं. इन आंकड़ों से साफ है कि अगर यही स्थिति चुनाव में रहती है, तो कई सीटों पर परिणाम बदल सकते हैं.

सीटवार आंकड़ों का विश्लेषण

एसआईआर के आंकड़ों के अनुसार, समाजवादी पार्टी की 102 सीटों पर वोटों में 26 हजार से लेकर 1.07 लाख तक की कमी आई है. वहीं बीजेपी की 257 सीटों पर यह आंकड़ा 26 हजार से बढ़कर 3.16 लाख तक पहुंच गया. अमरोहा शहर, जो मुस्लिम बहुल और एसपी की सीट है, वहां सबसे कम 26,233 वोट घटे. दूसरी तरफ बीजेपी की साहिबाबाद सीट पर सबसे ज्यादा 3,16,484 वोट कम हुए हैं.

सहयोगी दलों की स्थिति

बीजेपी के सहयोगी दलों की सीटों पर भी असर साफ दिखाई दिया है. अपना दल की सीटों पर 27 हजार से 72 हजार, सुभासपा की सीटों पर 28 हजार से 50 हजार, और निषाद पार्टी की सीटों पर 30 हजार से 59 हजार वोट घटे हैं. वहीं आरएलडी की सीटों पर भी 27 हजार से 48 हजार वोटों की कमी दर्ज की गई है.

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