पीएम मोदी की अपील के बाद दिल्ली में पहला ‘मेट्रो मंडे’ आज, DMRC की खास तैयारी

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचाने और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की अपील के बाद दिल्ली सरकार ने “मेट्रो मंडे” अभियान की शुरुआत की है. इस पहल का पहला दिन सोमवार को मनाया जा रहा है. सरकार ने लोगों से निजी वाहनों के बजाय मेट्रो और बस जैसी सार्वजनिक परिवहन सेवाओं का अधिक उपयोग करने की अपील की है. 

DMRC ने क्या विशेष तैयारियां कीं? 

इस अभियान को लेकर राजधानी में व्यापक प्रचार किया गया, जिसके चलते सोमवार को मेट्रो और बसों में यात्रियों की संख्या बढ़ने की संभावना जताई जा रही है. संभावित भीड़ को देखते हुए दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने विशेष तैयारियां की हैं. सोमवार को छह अतिरिक्त मेट्रो ट्रेनें चलाई जाएंगी, जो कुल 24 अतिरिक्त फेरे लगाकर यात्रियों को राहत देंगी. इसके अलावा जरूरत पड़ने पर अन्य दिनों में भी अतिरिक्त फेरे बढ़ाने की योजना बनाई गई है. डीएमआरसी ने सुरक्षा और टिकटिंग व्यवस्था को भी मजबूत करने का फैसला किया है ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े.

दिल्ली सरकार ने बस सेवाओं को भी पूरी क्षमता के साथ सड़कों पर उतारने की तैयारी की है. राजधानी में डीटीसी की सभी 6,300 बसें सोमवार को संचालित होंगी. इनमें बड़ी संख्या इलेक्ट्रिक बसों की है, जिन्हें पर्यावरण के अनुकूल परिवहन के रूप में देखा जा रहा है. इसके साथ ही 29 सरकारी कॉलोनियों से कर्मचारियों को नजदीकी मेट्रो स्टेशन तक पहुंचाने के लिए 58 विशेष बसों की व्यवस्था की गई है. सरकार का उद्देश्य है कि कर्मचारी आसानी से मेट्रो तक पहुंचें और निजी वाहनों के इस्तेमाल से बचें.

दिल्ली मेट्रो का नेटवर्क कितना लंबा? 

दिल्ली मेट्रो का नेटवर्क वर्तमान में करीब 416 किलोमीटर लंबा है और इसमें 303 स्टेशन शामिल हैं. रोजाना 343 ट्रेनों के जरिए 4,500 से अधिक फेरे लगाए जाते हैं. दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और बहादुरगढ़ समेत एनसीआर के लाखों लोग हर दिन मेट्रो सेवा का उपयोग करते हैं. मेट्रो राजधानी के व्यावसायिक, शैक्षणिक और आवासीय इलाकों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है.

भीड़ को नियंत्रित करने के लिए डीएमआरसी अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों की तैनाती करेगी. कई अतिरिक्त टिकट काउंटर खोले जाएंगे और डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर व बैगेज स्कैनर भी बढ़ाए जाएंगे. साथ ही लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया जाएगा. सरकार का मानना है कि “मेट्रो मंडे” जैसी पहल से लोगों में सार्वजनिक परिवहन अपनाने की आदत मजबूत होगी और ईंधन की बचत के साथ प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलेगी.

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