Stock Market: 5 दिन में निवेशकों की बल्ले-बल्ले, सेंसेक्स 4055 अंक चढ़ा, 20.81 लाख करोड़ की कमाई

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नई दिल्ली: अचानक शेयर बाजार की चाल बदल गई है। पिछले 5 दिनों से लगातार तेजी देखने को मिल रही है, जबकि इस दौरान दुनियाभर के बाजार दबाव में हैं। खासकर अमेरिकी बाजार में गिरावट हावी है, लेकिन भारतीय बाजार बेफिक्र होकर आगे बढ़ रहा है। इस तेजी से निवेशकों ने राहत की सांस ली है।आंकड़ों को देखें तो पिछले 5 कारोबारी सत्र में BSE का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 4,055 अंक से ज्यादा मजबूत हुआ है। बुधवार को कारोबार के अंत में सेंसेक्स 383.55 अंक यानी 0.50 फीसदी की तेजी के साथ 77,301.40 पर बंद हुआ।

वहीं NSE का निफ्टी भी बुधवार को 149.75 अंक या 0.63 फीसदी की बढ़त के साथ 23,960.60 पर बंद हुआ। पिछले 5 दिनों में निफ्टी में कुल 1,261.75 अंकों की तेजी आ चुकी है।

एक दिन में ₹6.65 लाख करोड़ का फायदा

लगातार 5 दिनों की तेजी ने निवेशकों की झोली भर दी है। सिर्फ बुधवार को BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप बढ़कर ₹493.44 लाख करोड़ हो गया। इससे एक ही दिन में निवेशकों की संपत्ति में करीब ₹6.65 लाख करोड़ का इजाफा हुआ। अगर पिछले पांच सत्रों का कुल लाभ देखें तो निवेशकों की संपत्ति में ₹20.81 लाख करोड़ की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

मिडकैप-स्मॉलकैप ने मारी बाजी

इस तेजी में बड़े शेयरों के मुकाबले मिडकैप और स्मॉलकैप ने ज्यादा ताकत दिखाई है। निफ्टी मिडकैप 100 में 1.55 फीसदी और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 2 फीसदी की जोरदार तेजी आई। सेक्टर की बात करें तो आईटी को छोड़कर बाकी सभी प्रमुख इंडेक्स हरे निशान में बंद हुए। इसमें मीडिया, रियल्टी और मेटल शेयरों की अगुवाई सबसे आगे रही।

तेजी के पीछे क्या वजह?

बाजार जानकारों के मुताबिक इस तेजी के पीछे कई घरेलू और वैश्विक वजहें हैं। आगामी केंद्रीय बजट में टैक्स राहत की खबर ने बाजार में जोश भरा है। खासकर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स में कटौती पर विचार को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बयान से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है।इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, बेहतर तिमाही नतीजे और त्योहारी सीजन में मजबूत मांग ने बाजार का मनोबल ऊंचा रखा है। डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार चौथे सत्र में मजबूत हुआ है, जिससे भी बाजार को सहारा मिला है।

अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के नतीजों के बाद वैश्विक बाजारों में सकारात्मक रुख दिखा है। इससे ट्रेड और टैरिफ नीतियों को लेकर संतुलित नजरिए की उम्मीद जगी है, जिससे उभरते बाजारों में विदेशी निवेशकों का पैसा आ सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि मजबूत घरेलू मांग और अच्छी अर्निंग्स की वजह से निकट भविष्य में बाजार का रुख सकारात्मक रह सकता है, हालांकि भू-राजनीतिक जोखिम और क्रूड की कीमतों में उतार-चढ़ाव से बीच-बीच में मुनाफावसूली भी देखने को मिल सकती है।

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