राष्ट्रपति भवन में गूंजा बिहार का नाम, 3 कलाकारों को मिला संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड

0
10
Droupadi Murmu
Pinterest

पटना: नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने वर्ष 2024 और 2025 के लिए संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप तथा पुरस्कार वितरित किए। देश भर के कुल 108 शीर्ष कलाकारों को इस प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया, जिनमें बिहार के तीन वरिष्ठ साधक भी शामिल हैं। अपनी कला के प्रति चार से पांच दशकों की निरंतर निष्ठा और अतुलनीय योगदान के लिए बिहार के इन कलाकारों को ताम्रपत्र, प्रशस्ति पत्र और एक-एक लाख रुपये की सम्मान राशि प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस गौरवपूर्ण अवसर पर संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह, अकादमी की अध्यक्ष डॉ. संध्या पुरेचा और संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल विशेष रूप से मौजूद रहे।

मैथिली रंगमंच से लोक वादन तक

पुरस्कृत होने वाली हस्तियों में मैथिली रंगमंच के वरिष्ठतम स्तंभ शिव नारायण झा ‘कुणाल’ शामिल हैं। उन्होंने मैथिली नाटकों में नवीन प्रयोगों के साथ-साथ पारंपरिक कीर्तनियां शैली को आधुनिक रंगमंच पर लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वहीं, पटना के जाने-माने अभिनेता और निर्देशक सुरेश हज्जू को भी इस सर्वोच्च सम्मान से विभूषित किया गया। निर्माण कला मंच और विशाल नाट्य मंच जैसी संस्थाओं की नींव रखने वाले सुरेश हज्जू ने ‘बिदेसिया का बटोही’ और ‘बकरी’ के दुर्जन सिंह जैसी जीवंत भूमिकाओं से अपनी अमिट छाप छोड़ी है। तीसरी शख्सियत मधुबनी जिले के वरिष्ठ कलाकार गुरु महेंद्र राम हैं, जो पिछले 55 वर्षों से मिथिला की पारंपरिक लोक वाद्य शैली ‘रसनचौकी’ का संरक्षण और संवर्धन कर रहे हैं।

मंच पर बना भावनात्मक पल

पुरस्कार वितरण के दौरान एक अत्यंत आत्मीय क्षण तब आया जब सुरेश हज्जू मंच पर सम्मान लेने पहुंचे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें देखते ही मुस्कुराते हुए पूछा कि आप ही गांधी जी का किरदार निभाते हैं न। हज्जू के सकारात्मक उत्तर पर राष्ट्रपति ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से उनका परिचय कराया। जब अभिनेता ने कौतूहलवश पूछा कि आपको इस बारे में कैसे ज्ञात हुआ, तो राष्ट्रपति ने सहजता से बताया कि उन्होंने उनके अभिनय का वीडियो देखा है। इस अनपेक्षित आत्मीयता और सम्मान से अभिभूत होकर हज्जू ने भविष्य में अपनी कलात्मक यात्रा को और अधिक संजीदगी व निष्ठा के साथ आगे बढ़ाने का संकल्प जताया। वे मैथिली थिएटर जगत के एक अनुभवी कलाकार हैं। उन्हें यह सम्मान मैथिली नाटकों में नए प्रयोग करने और पारंपरिक ‘कीर्तनिया’ नाट्य शैली को लोकप्रिय बनाने के लिए मिला है।

बिहार की प्रतिभा का दिखा डंका

बिहार के गया जिले में संगीतकारों के गाँव ईश्वरपुर के रहने वाले पंडित कृष्ण मोहन पाठक को प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित एक विशेष सम्मान समारोह में यह पुरस्कार प्रदान किया। पुरस्कृत होने वाली हस्तियों में मैथिली रंगमंच के वरिष्ठतम स्तंभ शिव नारायण झा ‘कुणाल’ शामिल हैं। पटना के जाने-माने अभिनेता और निर्देशक सुरेश हज्जू को भी इस सर्वोच्च सम्मान से विभूषित किया गया। तीसरी शख्सियत मधुबनी जिले के वरिष्ठ कलाकार गुरु महेंद्र राम हैं, जो पिछले 55 वर्षों से मिथिला की पारंपरिक लोक वाद्य शैली ‘रसनचौकी’ का संरक्षण और संवर्धन कर रहे हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here