ईरान के हमलों से UAE पर टूटा कहर, 3,000 से ज्यादा ड्रोन-मिसाइलें दागीं; खाड़ी देशों की सुरक्षा पर अरबों खर्च

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पश्चिम एशिया में पहले से मौजूद अस्थिरता के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने साफ संकेत दिया है कि वह क्षेत्र में किसी नए सैन्य संघर्ष का समर्थन नहीं करेगा। अमीरात के राष्ट्रपति के सलाहकार अनवर गरगाश ने बहरीन की राजधानी मनामा में आयोजित सुरक्षा सम्मेलन के दौरान कहा कि मौजूदा विवाद को हथियारों के इस्तेमाल से सुलझाने की कोशिश पूरे क्षेत्र के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है। उनके मुताबिक, ईरान से जुड़ा युद्ध केवल कुछ देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके प्रभाव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महसूस किए गए हैं। UAE चाहता है कि अमेरिका और ईरान बातचीत के जरिए तनाव कम करने का रास्ता निकालें।

इस दिशा में कतर की मध्यस्थता से हो रही कोशिशों को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गरगाश ने यह भी स्वीकार किया कि दोनों पक्षों के बीच मतभेद काफी गहरे हैं और सहमति बनाना आसान नहीं होगा। इसके बावजूद उनका मानना है कि कूटनीतिक प्रयास जारी रहना चाहिए, क्योंकि सैन्य कार्रवाई से संकट का दायरा और बढ़ सकता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए कतर की मध्यस्थता

ईरान के विदेश मंत्री  के अनुसार, उनका देश कतर में एक प्रस्ताव पर चर्चा कर रहा है, जिसके जरिए होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का रास्ता निकल सकता है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। हालांकि अराघची ने स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ उनकी सीधी बातचीत नहीं चल रही है। किसी भी संभावित समझौते पर आगे बढ़ना अमेरिकी प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा। ईरान का कहना है कि वह अपने हितों की रक्षा के लिए कूटनीतिक और रक्षात्मक, दोनों विकल्पों के लिए तैयार है।

UAE पर तीन हजार से अधिक ड्रोन और मिसाइल हमले

खाड़ी क्षेत्र में युद्ध के दौरान सुरक्षा हालात कितने गंभीर रहे, इसका अंदाजा संयुक्त अरब अमीरात पर हुए हमलों से लगाया जा सकता है। इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (IISS) के मुताबिक, अप्रैल में युद्धविराम लागू होने से पहले ईरान की ओर से UAE पर तीन हजार से ज्यादा ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गई थीं। इनके संभावित निशानों में हवाई अड्डे, सैन्य प्रतिष्ठान और तेल से जुड़ी सुविधाएं शामिल थीं। इनमें से अधिकतर हमलों को नाकाम कर दिया गया। इसके बाद खाड़ी देशों ने अपनी रक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए भारी निवेश किया। अनवर गरगाश के अनुसार, इस संघर्ष के बाद अमेरिका और अमीरात के बीच रणनीतिक संबंध पहले से अधिक मजबूत हुए हैं।

बहरीन भी हमलों की चपेट में आया

युद्ध के दौरान बहरीन को भी बड़े सुरक्षा खतरे का सामना करना पड़ा। IISS के आंकड़ों के अनुसार, ईरान की ओर से वहां लगभग 500 ड्रोन और करीब 200 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े का मुख्य ठिकाना मौजूद है। हमलों के दौरान नौसैनिक अड्डे के अलावा रिहायशी इमारतों और पानी को शुद्ध करने वाली सुविधा को भी निशाना बनाया गया। बहरीन के विदेश मंत्री अब्दुल्लतीफ बिन राशिद अल जायानी ने भी क्षेत्र में तनाव घटाने की कोशिशों का समर्थन किया है।

खाड़ी देशों को नए हमलों का डर

UAE और बहरीन की चिंताएं केवल पुराने हमलों तक सीमित नहीं हैं। दोनों देश मानते हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत विफल होने की स्थिति में क्षेत्र में फिर से सैन्य तनाव बढ़ सकता है। इसी आशंका के चलते खाड़ी देशों ने अपनी सुरक्षा तैयारियां मजबूत की हैं। इस गर्मी में हूती समूह की ओर से सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों और हवाई अड्डों पर हमलों में तेजी आने की बात भी सामने आई है।

ऊर्जा मार्ग और क्षेत्रीय स्थिरता दांव पर

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी बातचीत का महत्व केवल ईरान और अमेरिका के संबंधों तक सीमित नहीं है। इस मार्ग पर तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। UAE की प्राथमिकता है कि समुद्री आवाजाही सुरक्षित रहे और खाड़ी क्षेत्र किसी नए संघर्ष में न फंसे। अमीरात का संदेश है कि सैन्य ताकत का प्रदर्शन संकट को लंबा कर सकता है, जबकि बातचीत से सभी पक्षों के लिए स्वीकार्य रास्ता निकलने की संभावना बनी रह सकती है।

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