
कनाडा की एकता को लेकर जारी बहस अब आर्थिक हितों और प्रवासी समुदाय की भूमिका तक पहुंच गई है। पश्चिमी प्रांत अल्बर्टा में कुछ समूह कनाडा से अलग होकर स्वतंत्र देश बनाने की मांग कर रहे हैं। इसी माहौल में प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने पंजाबी भाषा के लोकप्रिय रेडियो स्टेशन रेडएफएम कैलगरी के जरिए भारतीय मूल के लोगों तक अपनी बात पहुंचाई। उन्होंने भारत के साथ बेहतर होते संबंधों, संभावित व्यापारिक अवसरों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित दिसंबर यात्रा का उल्लेख किया।
उनका संदेश है कि कनाडा के साथ बने रहकर भी अल्बर्टा अपने संसाधनों और अर्थव्यवस्था का विस्तार कर सकता है। भारतीय समुदाय की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि इस प्रांत में दक्षिण एशियाई मूल के लोगों की उल्लेखनीय आबादी रहती है। हालांकि, पूरे समुदाय की राजनीतिक सोच एक जैसी नहीं है।
तेल और गैस के संसाधनों से जुड़ा है अलगाव का मुद्दा
अल्बर्टा कनाडा के ऊर्जा उद्योग का प्रमुख केंद्र है। यहां तेल और प्राकृतिक गैस के विशाल भंडार मौजूद हैं। अलग देश के समर्थकों का तर्क है कि प्रांत को अपने प्राकृतिक संसाधनों, राजस्व और आर्थिक नीतियों पर अधिक नियंत्रण मिलना चाहिए। केंद्र सरकार की पर्यावरण संबंधी नीतियों और ऊर्जा क्षेत्र के फैसलों को लेकर भी लंबे समय से असहमति रही है। दूसरी ओर, कनाडा सरकार का मानना है कि संघीय व्यवस्था में रहते हुए भी अल्बर्टा को अंतरराष्ट्रीय व्यापार और साझा आर्थिक ढांचे से लाभ मिल सकता है। इसीलिए अलगाव की बहस केवल पहचान या राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि तेल की कमाई, रोजगार और भविष्य के निवेश से भी जुड़ी हुई है।
जनमत संग्रह की पहल, लेकिन आजादी का अंतिम फैसला नहीं
अल्बर्टा में अलगाव के मुद्दे पर जनमत संग्रह कराने की मांग को समर्थन मिला है। रिपोर्ट के अनुसार, इस साल करीब तीन लाख लोगों ने इससे जुड़ी याचिका पर हस्ताक्षर किए। जनवरी 2026 के एक सर्वे में 28 प्रतिशत लोगों ने प्रांत के कनाडा से अलग होने का समर्थन किया था। हालांकि, प्रस्तावित मतदान को सीधे स्वतंत्रता पर अंतिम फैसला समझना गलत होगा। इसमें यह तय करने की प्रक्रिया से जुड़ा सवाल है कि क्या प्रांत की सरकार को अलग होने पर बाध्यकारी जनमत संग्रह कराने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। यदि अलगाव समर्थकों को समर्थन मिलता भी है, तो स्वतंत्र देश बनने के लिए आगे संवैधानिक प्रक्रिया और बातचीत आवश्यक होगी। इसमें संघीय सरकार, अन्य प्रांतों तथा मूल निवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े मुद्दे भी शामिल होंगे।
भारतीय मूल के लोगों की संख्या और भविष्य की चिंता
कनाडा की 2021 की जनगणना के मुताबिक, अल्बर्टा में लगभग 2.98 लाख दक्षिण एशियाई मूल के लोग रहते थे। इस आबादी में भारतीयों के साथ पाकिस्तानी, श्रीलंकाई और अन्य दक्षिण एशियाई समुदाय भी शामिल हैं। हाल के वर्षों में भारत से आए लोगों की मौजूदगी ने इस समुदाय को स्थानीय सामाजिक और आर्थिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है। अलगाव से जुड़ी बहस में आव्रजन, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और सरकारी सुविधाओं के नियम भी चर्चा में हैं। ऐसे प्रस्ताव वहां रहने वाले प्रवासियों और अस्थायी रूप से काम करने वाले लोगों के भविष्य को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए कार्नी की अपील का एक पहलू समुदाय को संभावित बदलावों के बारे में आश्वस्त करना भी माना जा सकता है।
भारत के साथ व्यापार बढ़ाकर अल्बर्टा को क्या मिलेगा?
कार्नी भारत और कनाडा के बीच ऊर्जा, कृषि, शिक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा विमानन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं सामने रख रहे हैं। दोनों देश व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते यानी सीईपीए पर बातचीत कर रहे हैं। भारत जैसे बड़े बाजार तक बेहतर पहुंच अल्बर्टा के ऊर्जा उत्पादकों के लिए अवसर पैदा कर सकती है। कार्नी ने पाइपलाइन के माध्यम से वैंकूवर बंदरगाह तक तेल पहुंचाकर एशियाई बाजारों में बेचने की योजना का भी उल्लेख किया है। भारत इस संभावित कारोबार का हिस्सा बन सकता है। उनके तर्क के मुताबिक, कनाडा के साथ बने रहने से अल्बर्टा को बड़े व्यापारिक नेटवर्क और देश की आर्थिक ताकत का फायदा मिलेगा।
मोदी की प्रस्तावित यात्रा से रिश्तों को नई दिशा की उम्मीद
प्रधानमंत्री कार्नी ने दिसंबर में नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित दो दिवसीय कनाडा यात्रा का जिक्र करके द्विपक्षीय संबंधों के महत्व को रेखांकित किया है। भारत और कनाडा के रिश्तों में व्यापारिक सहयोग बढ़ने से अल्बर्टा के ऊर्जा क्षेत्र को नए अवसर मिल सकते हैं। दूसरी तरफ, अलगाव के समर्थक मानते हैं कि स्वतंत्र व्यवस्था में प्रांत अपने संसाधनों पर अधिक अधिकार हासिल कर सकेगा।
फिलहाल बहस का केंद्र यही है कि आर्थिक हितों और राजनीतिक स्वायत्तता के बीच अल्बर्टा के लिए बेहतर रास्ता कौन-सा होगा। कार्नी भारतीय समुदाय तक पहुंच बनाकर यह संदेश देना चाहते हैं कि कनाडा के भीतर रहना भी विकास और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के नए रास्ते खोल सकता है।











