यूरोप को रूसी गैस बेचने की अमेरिकी तैयारी, यूक्रेन के रास्ते खुल सकता है नया रास्ता

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रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को समाप्त कराने की कोशिशों के साथ अमेरिका अब ऊर्जा कारोबार को भी कूटनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने पर विचार कर रहा है। अमेरिकी अधिकारियों की ओर से तैयार किए जा रहे एक प्रस्ताव में रूस से यूरोप तक गैस पहुंचाने के लिए यूक्रेन के पुराने पाइपलाइन नेटवर्क को फिर सक्रिय करने की संभावना शामिल है। इस व्यवस्था के तहत अमेरिकी मध्यस्थ रूसी गैस की बिक्री संभाल सकता है और कारोबार में अमेरिकी निवेशकों की हिस्सेदारी भी हो सकती है। सितंबर में अमेरिकी प्रतिनिधि जारेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ ने मॉस्को तथा कीव की यात्राओं के दौरान इस विचार पर चर्चा की थी।

माना जा रहा है कि यूरोप के बड़े ऊर्जा बाजार तक दोबारा पहुंच मिलने का आर्थिक लाभ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को किसी ऊर्जा समझौते के लिए तैयार कर सकता है। हालांकि इस योजना को यूरोपीय देशों की मौजूदा नीति और रूस के साथ उनके सुरक्षा संबंधी मतभेदों के कारण कठिन चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।

यूरोप की ऊर्जा नीति के सामने अमेरिकी प्रस्ताव

यूरोपीय संघ पहले ही रूस से प्राकृतिक गैस खरीदना पूरी तरह बंद करने का लक्ष्य तय कर चुका है। उसके कानून के मुताबिक सदस्य देशों को 2027 के अंत तक रूसी गैस पर निर्भरता समाप्त करनी है। यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद यूरोपीय देशों ने मॉस्को से ऊर्जा खरीद को सुरक्षा के लिहाज से जोखिम भरा माना है। युद्ध से पहले यूरोप की कुल गैस जरूरत का लगभग 45 प्रतिशत रूस से पूरा होता था, लेकिन अब यह हिस्सा घटकर करीब 11 प्रतिशत रह गया है। इसके मुकाबले अमेरिकी एलएनजी की हिस्सेदारी यूरोपीय खपत में लगभग 30 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।

गैस कारोबार से पुतिन को समझौते के लिए मनाने की कोशिश

अमेरिकी रणनीति के पीछे एक बड़ा विचार यह है कि यूरोप में दोबारा कारोबार शुरू होने की संभावना रूस को युद्ध से जुड़े तनाव कम करने के लिए प्रेरित कर सकती है। हालांकि वॉशिंगटन इस बात को लेकर भी सतर्क है कि गैस से मिलने वाली कमाई का इस्तेमाल रूसी सैन्य अभियान को मजबूत करने में न हो। इसी उद्देश्य से एक विकल्प पर विचार किया गया है, जिसके तहत यूरोप में गैस बिक्री से मिलने वाली रकम किसी तीसरे देश के एस्क्रो खाते में रखी जा सकती है। अमेरिकी अधिकारियों ने इस प्रस्ताव को यूरोपीय सरकारों के सामने सर्दियों में ऊर्जा की कीमतें कम करने के संभावित उपाय के रूप में भी रखा है।

यूक्रेन की पाइपलाइन बन सकती है सबसे तेज विकल्प

रूस के साइबेरिया स्थित उरेंगॉय गैस क्षेत्रों से यूरोप तक पहुंचने वाला पुराना पाइपलाइन नेटवर्क यूक्रेन से होकर गुजरता है। इस रास्ते से स्लोवाकिया के अलावा ऑस्ट्रिया और जर्मनी की ओर गैस पहुंचाई जा सकती है। जनवरी 2025 तक इस नेटवर्क से सीमित आपूर्ति जारी थी, इसलिए इसे दोबारा इस्तेमाल करने का विकल्प अपेक्षाकृत जल्दी लागू किया जा सकता है। गैस के पारगमन से यूक्रेन को भी शुल्क के रूप में आमदनी हो सकती है। इसके विपरीत नॉर्ड स्ट्रीम पाइपलाइन को फिर शुरू करना काफी मुश्किल होगा। नॉर्ड स्ट्रीम-1 से अगस्त 2022 में आपूर्ति रुक गई थी, जबकि नॉर्ड स्ट्रीम-2 कभी चालू ही नहीं हुई। सितंबर 2022 में समुद्र के भीतर हुए विस्फोटों से दोनों पाइपलाइनें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थीं।

युद्ध के बीच ऊर्जा समझौते की राह फिर मुश्किल

प्रस्ताव पर चर्चा उस समय तेज हुई है जब यूक्रेन ने रूस की तीन प्रमुख तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाया है। इससे पहले अमेरिकी दबाव के बाद यूक्रेन ने रूसी रिफाइनरियों पर हमले रोक दिए थे। यह विराम लगभग दो सप्ताह चला, लेकिन रूस की ओर से यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे पर हमले जारी रहे। अब नवंबर के मध्य में अबू धाबी में अमेरिका, रूस और यूक्रेन के बीच प्रस्तावित त्रिपक्षीय बातचीत से पहले ऊर्जा युद्धविराम का मुद्दा फिर चर्चा में है। मॉस्को ने अभी तक इस तरह की व्यवस्था को स्वीकार करने के संकेत नहीं दिए हैं।

यूरोप में भी प्रस्ताव को लेकर मतभेद

यूरोपीय सरकारों के भीतर इस योजना को लेकर एकराय नहीं है। कुछ अधिकारी इसे सर्दियों में ऊर्जा खर्च घटाने का अवसर मान सकते हैं, जबकि दूसरे इसे रूस पर निर्भरता दोबारा बढ़ाने वाला कदम समझते हैं। जर्मनी में भी सस्ती रूसी गैस की वापसी राजनीतिक बहस का विषय बन चुकी है। दूसरी ओर, ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण कतर से एलएनजी की आपूर्ति प्रभावित होने और यूरोप की ऊर्जा लागत बढ़ने की बात भी सामने आई है।

यूरोपीय संघ के अनुसार इस संघर्ष से ऊर्जा खर्च में करीब 100 अरब यूरो की अतिरिक्त वृद्धि हुई है। ऐसे हालात में अमेरिका की योजना को आर्थिक राहत और राजनीतिक जोखिम, दोनों कसौटियों पर परखा जाएगा। यूक्रेन के लिए भी किसी समझौते की स्वीकार्यता इस बात पर निर्भर कर सकती है कि उसकी ऊर्जा सुविधाओं की सुरक्षा सुनिश्चित होती है या नहीं।

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