पटना: बिहार विधान परिषद चुनाव में निर्दलीय जीते दो एमएलसी के बीजेपी को समर्थन देने के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। तिरहुत स्नातक से जीते बंशीधर ब्रजवासी और सारण शिक्षक सीट से जीते राहुल राज ने शनिवार को पटना में बीजेपी कार्यालय पहुंचकर समर्थन का ऐलान किया। पहले दावा किया गया कि दोनों ने बीजेपी की सदस्यता ले ली है, लेकिन बाद में पार्टी ने इससे इनकार कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम पर आरजेडी और प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने सवाल उठा दिए हैं।
शनिवार दोनों नेता पहुंचे बीजेपी कार्यालय
जानकारी के मुताबिक, दोनों नेता शनिवार शाम प्रदेश बीजेपी कार्यालय पहुंचे थे और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की मौजूदगी में हुई विधानमंडल दल की बैठक में भी शामिल हुए। बीजेपी दफ्तर से उनकी एक तस्वीर भी सामने आई, जिसमें दोनों के हाथ में सदस्यता पर्ची और गले में भगवा-हरा गमछा था। इसके बाद प्रदेश बीजेपी ने कहा कि दोनों औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल हो गए हैं। हालांकि, कुछ देर बाद ही बयान बदल गया। बीजेपी ने कहा कि दोनों ने सदस्यता नहीं ली, सिर्फ सरकार को समर्थन दिया है।
बंशीधर पलटे, राहुल चुप
बीजेपी कार्यालय से बाहर निकलने के बाद बंशीधर ब्रजवासी ने पहले कहा था कि शिक्षकों की समस्याओं के समाधान के आश्वासन पर उन्होंने सदस्यता ले ली है। लेकिन कुछ देर बाद फेसबुक लाइव आकर वह अपने बयान से पलट गए। उन्होंने कहा, “मैं बीजेपी में नहीं गया हूं, सिर्फ सदन में सरकार का समर्थन करूंगा। अगर शिक्षकों की मांगें पूरी नहीं हुईं तो विरोध भी करूंगा।”
वहीं राहुल राज ने कहा था कि वह 15 साल तक बीजेपी में रहे हैं और विचारधारा से जुड़े हैं, इसलिए सदस्यता ली है। लेकिन बीजेपी के इनकार के बाद उन्होंने कोई नया बयान नहीं दिया।
सदस्यता जाने का खतरा क्यों?
जन सुराज पार्टी के वकील कुमार अमित ने कहा कि संविधान की 10वीं अनुसूची के पैरा 2(2) और अनुच्छेद 191(2) के मुताबिक, निर्दलीय चुना गया सदस्य अगर चुनाव के बाद किसी पार्टी में शामिल होता है तो उसकी सदस्यता रद्द हो सकती है। शपथ से पहले ही पार्टी ज्वाइन करना कानून के खिलाफ है। जन सुराज ने विधान परिषद के सभापति से शिकायत करने की बात कही है। आरजेडी प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने भी इसे असंवैधानिक और लोकतंत्र का मजाक बताया।
बता दें, कि दोनों ने जेडीयू उम्मीदवारों को हराया है। बंशीधर ने अभिषेक झा को और राहुल राज ने आनंद पुष्कर को हराकर जीत हासिल की है। राहुल पहले बीजेपी कार्यसमिति सदस्य थे, निर्दलीय लड़ने पर निष्कासित कर दिए गए थे।












