नई दिल्ली: बिहार के चर्चित दुलारचंद यादव हत्याकांड में मोकामा विधायक अनंत सिंह की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत बढ़ाने से इनकार करते हुए 1 दिसंबर तक सरेंडर करने का आदेश दिया है। 30 अक्टूबर को सुनाए गए इस फैसले के साथ ही पटना हाईकोर्ट से मिली उनकी जमानत भी रद्द हो गई है। खास बात यह है कि इसी दिन दुलारचंद यादव की हत्या को एक साल पूरा हुआ है।
दुलारचंद यादव की 30 अक्टूबर 2025 को हत्या कर दी गई थी। इस मामले में अनंत सिंह मुख्य आरोपी हैं। पटना हाईकोर्ट ने 19 मार्च को उन्हें जमानत दे दी थी। इस फैसले को दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। उन्होंने याचिका में अनंत सिंह की जमानत रद्द कर उन्हें दोबारा जेल भेजने की मांग की थी। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की पीठ में गुरुवार को मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान अनंत सिंह के वकील ने परिवार में 25 नवंबर को होने वाली शादी का हवाला देते हुए कुछ समय मांगा। कोर्ट ने उनकी बात पर विचार करते हुए 1 दिसंबर तक सरेंडर करने का निर्देश दिया।
बिहार सरकार को चार महीने में जांच पूरी करने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को चार महीने के भीतर मामले की जांच पूरी करने को कहा है। इसके बाद मामले में अगली सुनवाई होगी। इससे पहले 29 सितंबर को हुई सुनवाई में अदालत ने साफ कर दिया था कि 30 अक्टूबर को किसी तरह की और मोहलत नहीं दी जाएगी। अनंत सिंह ने उस समय हलफनामा दाखिल करने के लिए समय मांगा था। बिहार सरकार ने 24 अक्टूबर को अपना जवाब दाखिल किया था।
नीरज कुमार ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि हाईकोर्ट ने अनंत सिंह को जमानत देते समय उनके आपराधिक रिकॉर्ड पर ध्यान नहीं दिया। राज्य सरकार ने अपने हलफनामे में उनके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण और आर्म्स एक्ट समेत गंभीर आरोपों वाले 62 मुकदमों की जानकारी दी है।
JDU ने अनंत सिंह और पत्नी को पार्टी से निकाला
इस घटनाक्रम के बीच जनता दल यूनाइटेड ने अनंत सिंह को पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया था। उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया। उनकी पत्नी और पूर्व विधायक नीलम देवी को भी छह साल के लिए पार्टी से बाहर कर दिया गया है। इसके अलावा उन्हें सरकारी आवास खाली करने का नोटिस भी जारी हुआ है।












