वृंदावन: कार्तिक मास में धर्मनगरी वृंदावन में देश के विभिन्न हिस्सों से प्राचीन और दुर्लभ विग्रहों का आगमन हो रहा है। इसी क्रम में असम के सिलचर में विराजमान 541 वर्ष प्राचीन ठाकुर गौरांग महाप्रभु वृंदावन पहुंचे हैं। सप्त देवालयों में शामिल श्रीराधा दामोदर मंदिर में ठाकुर जी के विराजमान होने से श्रद्धालुओं को उनके दिव्य स्वरूप के दर्शन का विशेष अवसर मिल रहा है। 27 अक्तूबर को वृंदावन पहुंचे ठाकुर गौरांग महाप्रभु दो नवंबर तक मंदिर में भक्तों को दर्शन देंगे।
कार्तिक मास में विशेष धार्मिक आयोजन
श्रीराधा दामोदर मंदिर के सेवायत अंगसेवी दामोदर चंद्र गोस्वामी महाराज के अनुसार, बड़े गुसाईं आचार्य कनिका प्रसाद गोस्वामी के सानिध्य में कार्तिक मास के विशेष धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं। इसी दौरान ठाकुर गौरांग महाप्रभु का आगमन भक्तों के लिए विशेष आकर्षण बना हुआ है। कार्तिक मास को दामोदर मास भी कहा जाता है। इस महीने में ठाकुर जी के दर्शन, मंदिरों की परिक्रमा और दीपदान को विशेष पुण्यदायी माना गया है।
विग्रह का इतिहास और विशिष्ट स्वरूप
उन्होंने बताया कि ठाकुर गौरांग महाप्रभु का विग्रह करीब 541 वर्ष पुराना है। इसका प्राकट्य तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान, वर्तमान बांग्लादेश में हुआ था। धार्मिक मान्यता के अनुसार, चैतन्य महाप्रभु के दादा उपेंद्र नाथ मिश्र को भगवान जगन्नाथ ने विग्रह प्रकट करने का आदेश दिया था। ठाकुर जी की प्रतिमा की सबसे खास विशेषता उनकी बड़ी-बड़ी आंखें हैं, जो भगवान जगन्नाथ के स्वरूप की याद दिलाती हैं। यही विशिष्ट स्वरूप श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहता है।
श्रद्धालुओं को मिला दुर्लभ दर्शन का अवसर
वर्तमान में असम के सिलचर में राधापद मिश्र द्वारा ठाकुर गौरांग महाप्रभु की नियमित सेवा-पूजा की जाती है। कार्तिक मास में उनका वृंदावन आगमन भक्तों के लिए दुर्लभ दर्शन का अवसर बन गया है। इस दौरान सुरेश शर्मा, गोपाल शरण शर्मा, महेश शर्मा, ओमप्रकाश घाटवाले, राधापति दास और अर्चना देवी दासी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
Reported By: Prem Kaushik












