मथुरा: खेती को अधिक लाभकारी बनाने के साथ पशुपालन को आजीविका का मजबूत माध्यम बनाने की जरूरत है। किसान यदि कृषि के साथ बकरी पालन को भी अपनाएं तो उनकी आमदनी में इजाफा हो सकता है। इसके लिए बकरी पालने वाले किसान एफपीओ और स्वयं सहायता समूह बनाकर अपने उत्पादों की मार्केटिंग खुद करें। यह बात केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी ने शुक्रवार को फरह स्थित केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (सीआईआरजी) में आयोजित पीएम-किसान उत्सव दिवस कार्यक्रम में कही।
पीएम-किसान की 24वीं किस्त का सीधा प्रसारण
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पीएम-किसान सम्मान निधि योजना की 24वीं किस्त जारी किए जाने का सीधा प्रसारण किया गया। इस दौरान करीब 800 किसान, पशुपालक और अन्य लोग मौजूद रहे। जयंत चौधरी ने कहा कि वर्ष 2019 में शुरू हुई पीएम-किसान सम्मान निधि योजना किसानों को आर्थिक संबल देने का माध्यम बनी है। किसानों के हाथ में सीधे पैसा पहुंचने से उनकी क्रय शक्ति बढ़ती है, जिसका सकारात्मक असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। इससे छोटे व्यापारियों से लेकर मजदूर वर्ग तक को लाभ मिलता है।
कृषि अनुसंधान और पशुपालन पर जोर
उन्होंने कहा कि देश के करीब आधे जिलों में 50 प्रतिशत से अधिक कामगार कृषि क्षेत्र पर निर्भर हैं। ऐसे में खेती को मजबूत और मुनाफे का व्यवसाय बनाने के लिए कृषि अनुसंधान, तकनीक और नवाचार को बढ़ावा देना जरूरी है। औद्योगीकरण और रोजगार के दूसरे विकल्प बढ़ने के बावजूद देश की बड़ी आबादी की आजीविका आज भी खेती पर टिकी है। ऐसे में कृषि के साथ पशुपालन को जोड़ना किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने का प्रभावी रास्ता हो सकता है।
संस्थान से समन्वय और पारदर्शिता पर चर्चा
केंद्रीय मंत्री ने संस्थान की अनुसंधान और प्रशिक्षण गतिविधियों की सराहना करते हुए निदेशक डॉ. मनीष कुमार चेटली से मुलाकात की। इस दौरान कौशल विकास मंत्रालय, कृषि विभाग और संस्थान के बीच समन्वय स्थापित कर नए प्रशिक्षण एवं रोजगारपरक कार्यक्रम शुरू करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। उन्होंने कौशल विकास प्रशिक्षण केंद्रों में आधार आधारित उपस्थिति और डीबीटी व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना जरूरी है। अब लाभार्थियों को भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में भेजा जा रहा है और सरकारी धन का इस्तेमाल निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही किया जाएगा।
सीआईआरजी द्वारा वैज्ञानिक मार्गदर्शन
संस्थान के निदेशक डॉ. मनीष कुमार चेटली ने कहा कि सीआईआरजी बकरी पालन को वैज्ञानिक और व्यावसायिक स्वरूप देने के लिए अनुसंधान, प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध करा रहा है। इसका उद्देश्य पशुपालन के जरिए ग्रामीण परिवारों की आजीविका को मजबूत करना है। कार्यक्रम के दौरान संस्थान के वैज्ञानिकों ने किसानों को मिट्टी की गुणवत्ता, उर्वरता बनाए रखने और टिकाऊ कृषि पद्धतियों के बारे में भी जानकारी दी।
Reported By: Prem Kaushik












