वृंदावन: ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में अब श्रद्धालु ठाकुरजी की ओर फूलमाला, मिठाई और प्रसाद उछालकर अर्पित नहीं कर सकेंगे। मंदिर में इस तरह की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति ने सख्त कदम उठाया है। सोमवार को मंदिर के जगमोहन के ऊपर सूचना बोर्ड लगाकर श्रद्धालुओं को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि ठाकुरजी की ओर कोई भी सामग्री फेंककर अर्पित करना प्रतिबंधित है। नियम का उल्लंघन करने वालों को रोकने के लिए मंदिर प्रबंधन और कर्मचारियों को भी निर्देशित किया गया है।
क्यों लेना पड़ा सीधा प्रतिबंध का फैसला?
दरअसल, मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से फूलमाला और प्रसाद ठाकुरजी की ओर उछालकर अर्पित करने की परंपरा के चलते कई बार ये सामग्री नीचे गिर जाती है। इनमें तुलसी की माला भी शामिल होती है, जो श्रद्धालुओं के पैरों के नीचे आ जाती है। मंदिर में भंडारियों की संख्या सीमित होने के कारण श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित की जाने वाली सामग्री को व्यवस्थित तरीके से ग्रहण करने में भी परेशानी सामने आ रही थी। इस स्थिति को देखते हुए प्रबंधन समिति ने पहले सेवायतों से बातचीत कर इस परंपरा को रोकने में सहयोग मांगा था, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने पर अब सीधे प्रतिबंध लागू कर दिया गया है।
पहले भी उठाए जा चुके हैं कई सख्त कदम
मंदिर की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए समिति पहले भी कई अहम कदम उठा चुकी है। श्रद्धालुओं के चढ़ावे में पारदर्शिता लाने के लिए ऑनलाइन चढ़ावा जमा करने की सुविधा के तहत विभिन्न स्थानों पर बारकोड लगाए गए हैं। वहीं, मंदिर की गुल्लक के आसपास डलिया रखकर चढ़ावे में छेड़छाड़ किए जाने की जानकारी मिलने के बाद भी प्रबंधन ने सख्ती दिखाई थी। इसके साथ ही भंडारियों की संख्या निर्धारित करते हुए श्रद्धालुओं से मिलने वाला चढ़ावा सीधे लेने पर भी निर्देश जारी किए गए। वर्तमान में सेवाधिकारी की सहायता के लिए मंदिर में दो भंडारी तैनात हैं, जबकि पहले इनकी संख्या करीब आधा दर्जन हुआ करती थी।
समिति की ओर से जारी निर्देशों में मिठाई, पेड़ा, फूलमाला अथवा अन्य किसी भी सामग्री को फेंककर ठाकुरजी को अर्पित करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। इसे प्रतिबंधित और दंडनीय बताते हुए मंदिर कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि ऐसा करने वाले श्रद्धालुओं को तत्काल रोकें। प्रबंधन का उद्देश्य मंदिर में दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के साथ ही प्रसाद और पूजित सामग्री को पैरों में गिरने से बचाना है। अब देखना होगा कि नए निर्देशों का पालन कराने में मंदिर प्रबंधन को कितनी सफलता मिलती है।
Reported by: Prem Kaushik












