नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। लखनऊ जोनल कार्यालय ने धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत विश्वविद्यालय की जमीन और इमारतों में से 426.46 करोड़ की संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क की है। इस संपत्ति का वर्तमान बाजार मूल्य करीब 1,170 करोड़ आंका गया है। मामला पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खान, मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और अन्य से जुड़ा है।
सरकारी धन के इस्तेमाल पर गंभीर सवाल
ईडी की जांच में आरोप सामने आए कि सरकारी निर्माण कार्यों की धनराशि और सामग्री विश्वविद्यालय परिसर में लगाई गई। जांच एजेंसी के अनुसार सरकारी ठेके पाने वाले कुछ ठेकेदारों ने अनुबंध की रकम का हिस्सा विश्वविद्यालय के निर्माण में खर्च किया और ट्रस्ट को दान भी दिया। एक ठेकेदार कंपनी के प्रबंध निदेशक ने कथित तौर पर ठेके की 30 से 40 प्रतिशत राशि निर्माण सामग्री खरीदने में इस्तेमाल होने की बात स्वीकार की।जांच में विधायक और विधान परिषद सदस्य निधि से 6.60 करोड़ के कार्य, सरकारी धन से पंडाल छात्रावास और अस्पताल खंड के निर्माण तथा सरकारी संपत्ति के स्वामित्व में बदलाव से जुड़े तथ्य भी सामने आए हैं।
499 करोड़ की लागत, वैध स्रोतों से केवल 72 करोड़ का हिसाब
स्वतंत्र मूल्यांकन के मुताबिक विश्वविद्यालय परिसर की कुल लागत 499.09 करोड़ आंकी गई। ईडी के अनुसार, इसमें से केवल 72.63 करोड़ का खर्च वैध स्रोतों से स्पष्ट हो सका, जबकि शेष 426.46 करोड़ को कथित अपराध की आय माना गया। इसी आधार पर संपत्ति कुर्क की गई।
मामले में किसानों की जमीन पर कथित कब्जे, शत्रु संपत्ति और अन्य आपराधिक मामलों की भी जांच की जा रही है। ईडी ने अगस्त 2026 में परिसर से जुड़े ठिकानों पर तलाशी लेकर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दस्तावेज जब्त किए थे। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि आगे की जांच जारी है।












