ईरान में मस्जिदें बन गईं हथियार ट्रेनिंग सेंटर! 3 करोड़ लोगों ने कर लिया रजिस्ट्रेशन

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Weapons Training in Iranian Mosques
Weapons Training in Iranian Mosques

नई दिल्ली: अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अपने नागरिकों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया है। ईरान की सरकारी मीडिया ने इसका वीडियो जारी किया है। वीडियो में देशभर की मस्जिदों में पुरुष, महिलाएं, युवा और किशोर हल्के हथियार चलाना सीख रहे हैं। राज्य टेलीविजन ने इसे देश की रक्षा के लिए जनता की तैयारी बताया है। दावा किया गया है कि इस अभियान में 3.1 करोड़ से ज्यादा लोग रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं।

जान फिदा बराए ईरान ऑपरेशन से जुड़ा अभियान

ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार इस रक्षात्मक गतिविधि को सीधे तौर पर जान फिदा बराए ईरान ऑपरेशन से जोड़ा गया है। इस अभियान का मकसद अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे मौजूदा संघर्ष के जवाब में नागरिकों को इस्लामी गणराज्य के समर्थन में एकजुट करना है। तेहरान ने लोगों से वॉलंटियर्स के रूप में पंजीकरण करने की अपील की है। राज्य मीडिया का कहना है कि 3.1 करोड़ से अधिक लोग पहले ही नाम दर्ज करा चुके हैं।

अहवाज से जाहेदान तक मस्जिदों में चल रही ट्रेनिंग 

सरकार ने मस्जिदों को ट्रेनिंग और सार्वजनिक तैयारियों का मुख्य केंद्र बना दिया है। अहवाज, करमान, बीजार, शिराज और जाहेदान जैसे शहरों की मस्जिदों में पुरुषों, महिलाओं और किशोरों को इकट्ठा किया जा रहा है। यहां वॉलंटियर्स को हल्के हथियार चलाने, उन्हें खोलने और जोड़ने की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी जा रही है। तेहरान में सरकार समर्थक रैलियों के दौरान रात में स्थानीय लोगों को बंदूक संभालना सिखाया जा रहा है।

परिवार के साथ युवा भी ले रहे हिस्सा 

टेलीविजन फुटेज में दिख रहा है कि ट्रेनिंग सत्रों में पूरे परिवार, युवा और किशोर बढ़ चढ़कर भाग ले रहे हैं। मस्जिदों के अंदर आत्मरक्षा के कौशल, हथियारों की जानकारी और सामूहिक अभ्यास कराया जा रहा है। ट्रेनिंग में शामिल लोगों को बताया जा रहा है कि संकट के समय कैसे खुद की और देश की रक्षा करनी है।

सरकार का मकसद: सामाजिक सुरक्षा मजबूत करना 

गौरतलब है कि ईरानी सरकार का मानना है कि इस कदम से जनता में जागरूकता बढ़ेगी और सामाजिक सुरक्षा को मजबूती मिलेगी। अधिकारियों के अनुसार मस्जिदों को इसलिए चुना गया क्योंकि ये लोगों के लिए आसानी से पहुंच योग्य हैं और सामुदायिक एकता का प्रतीक हैं। सरकार इसे रक्षात्मक तैयारी बता रही है। उसका कहना है कि देश पर खतरा बढ़ने के कारण नागरिकों को तैयार रहना जरूरी है।

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