नई दिल्ली: एक छोटा-सा मजाक कितना भारी पड़ सकता है, इसका अंदाजा अहमदाबाद से हैदराबाद आ रही फ्लाइट में तब हुआ, जब एक 12 साल की स्कूली छात्रा ने कह दिया कि विमान में बम है। यह बात सुनते ही विमान में हड़कंप मच गया और सुरक्षा एजेंसियां तुरंत अलर्ट हो गईं। हालांकि, जांच के बाद साफ हुआ कि यह सिर्फ एक प्रैंक था।
कक्षा 7 में पढ़ने वाली यह बच्ची शनिवार को अपने स्कूल ट्रिप के बाद दूसरे छात्रों और शिक्षकों के साथ हैदराबाद लौट रही थी। पूरा समूह उड़ान में साथ था और माहौल आम तौर पर हल्का-फुल्का था। उड़ान के दौरान उसने अपने बगल में बैठे एक सहपाठी से मजाक में कह दिया कि फ्लाइट में बम है। उसे शायद अंदाजा भी नहीं था कि उसकी यह बात इतना बड़ा मामला बन जाएगी।
केबिन क्रू ने सुन ली बात
पास में मौजूद एक केबिन क्रू सदस्य ने बच्ची की यह बात सुन ली। सुरक्षा को देखते हुए क्रू मेंबर ने बिना देर किए इसकी जानकारी विमान के पायलट को दे दी। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया। ऐसी किसी भी बात को हल्के में नहीं लिया जाता, क्योंकि सैकड़ों यात्रियों की जान का सवाल होता है। क्रू की इसी तत्परता की वजह से पूरा सुरक्षा तंत्र तुरंत हरकत में आ गया।
जैसे ही विमान हैदराबाद के राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरा, तय प्रोटोकॉल के तहत पूरे विमान की बारीकी से जांच की गई। सुरक्षा बलों ने हर हिस्से को खंगाला, लेकिन उन्हें कोई भी संदिग्ध या आपत्तिजनक चीज नहीं मिली। इसके बाद साफ हो गया कि बम की बात सिर्फ एक मजाक थी और यात्रियों को किसी तरह का खतरा नहीं था।
नाबालिग होने के कारण केस दर्ज नहीं
पुलिस अधिकारी के मुताबिक, बच्ची नाबालिग है और उसने बिना किसी गलत इरादे के, अनजाने में यह बात कही थी। इसी वजह से उसके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया गया। बाद में स्कूल के शिक्षकों ने बच्ची की काउंसलिंग की। उसे समझाया गया कि इस तरह की शरारतें कितनी गंभीर हो सकती हैं और भविष्य में ऐसा मजाक करने से बचना चाहिए। शिक्षकों ने उसे यह भी बताया कि एक लापरवाह बात से कितने लोगों को परेशानी उठानी पड़ सकती है।
यह घटना सभी के लिए एक सबक है। विमान या किसी भी सार्वजनिक जगह पर बम जैसी बात मजाक में भी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इससे यात्रियों, क्रू और सुरक्षा एजेंसियों, सभी को परेशानी उठानी पड़ती है। माता-पिता और स्कूलों को भी बच्चों को पहले से ऐसी बातों की गंभीरता समझानी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई बच्चा अनजाने में इस तरह की गलती न दोहराए।












