इस्लाम धर्म के सबसे बड़े और मुकद्दस त्योहारों में से एक ईद-उल-अजहा बकरीद की तैयारियां देश-दुनिया में पूरे जोरो पर हैं. लेकिन इस साल मवेशी बाजारों से आ रही तस्वीरें और कीमतें आम आदमी की जेब पर भारी पड़ रही हैं. त्योहार से ठीक पहले पशु बाजारों में महंगाई का ऐसा तांडव देखने को मिल रहा है कि सामान्य बकरियों की कीमत 5 लाख रुपये और भारी-भरकम कुर्बानी वाले बैलों के दाम 12 लाख रुपये तक जा पहुंचे हैं. चारे के बढ़ते दाम,ट्रांसपोर्टेशन में भारी बढ़ोतरी और वैश्विक स्तर पर उपजे आर्थिक हालातों ने इस बार कुर्बानी के बाजार का पूरा गणित बदल दिया है.
कब मनाई जाएगी बकरीद?
ईद-उल-अजहा का यह त्योहार इस्लामी कैलेंडर के आखिरी महीने ‘जुल हिज्जा’ की 10 तारीख को मनाया जाता है. यह पर्व पैगंबर हजरत इब्राहिम की अल्लाह के प्रति अगाध आस्था और उनके महान बलिदान की याद में मनाया जाता है. इस मौके पर दुनिया भर के मुसलमान अपनी हैसियत के मुताबिक हलाल पशुओं की कुर्बानी देते हैं और उसके मांस को तीन बराबर हिस्सों में बांटकर गरीबों, रिश्तेदारों और अपने घर में इस्तेमाल करते हैं.
इस साल तारीखों की बात करें तो सऊदी अरब, कुवैत, कतर, जॉर्डन और पाकिस्तान सहित कई देशों में बकरीद 27 मई 2026, बुधवार को मनाई जाएगी. वहीं भारत, बांग्लादेश और उपमहाद्वीप के अन्य हिस्सों में चांद के दीदार के मुताबिक यह त्योहार 28 मई 2026, गुरुवार को मनाया जाएगा.
दिल्ली की प्रसिद्ध मंडियों में जमुनापारी का जलवा
देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक जामा मस्जिद, जाफराबाद, ओखला और शाहदरा जैसे इलाकों में सजी अस्थायी मवेशी मंडियों में सुबह से ही खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ रही है. लेकिन कीमतों को सुनकर लोग हैरान हैं. बाजार में सामान्य छोटे मवेशियों की कीमत 25,000 रुपये से शुरू होकर 2 लाख रुपये के बीच बनी हुई है. वहीं राजस्थान से आने वाली विशेष नस्ल की प्रीमियम बकरियां, जैसे ‘सोजत’ और ‘जमुनापारी’, अपने बेहतरीन कद-काठी के कारण 3 लाख से 5 लाख रुपये तक की रिकॉर्ड कीमत पर बिक रही हैं. अगर बैलों की बात करें तो कुर्बानी के लिए तैयार तंदुरुस्त बैलों की शुरुआती कीमत 1 लाख रुपये है जबकि कुछ खास और दुर्लभ नस्ल के बैल 8 लाख रुपये या उससे भी अधिक दाम पर बेचे जा रहे हैं.
देश के सबसे बड़े ‘देवनार बाजार’ में उमड़े वीआईपी मवेशी
देवनार में इस बार महंगाई का असर सबसे ज्यादा दिख रहा है. बाजार में बकरियों के दाम 30,000 से 80,000 रुपये के बीच हैं लेकिन जो खरीदार प्रीमियम और भारी वजन वाले मवेशी तलाश रहे हैं उन्हें 7 लाख से 10 लाख रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं. कुछ चुनिंदा और विशालकाय बैलों की कीमत 12 लाख रुपये तक लगाई गई है. उत्तर प्रदेश के लखनऊ और कानपुर के बाजारों में भी सिरोही, कमोरी और बारबरी नस्लों की भारी किल्लत और मांग के चलते कीमतें पिछले साल के मुकाबले काफी तेज हैं.
दिल्ली के एक अनुभवी व्यापारी के मुताबिक पिछले साल जो बैल 4 से 5 लाख रुपये में आसानी से मिल जाता था. उसकी परवरिश और ट्रांसपोर्टेशन का खर्च बढ़ने से इस बार वह 8 से 10 लाख रुपये का पड़ रहा है. पशुओं के चारे और चूनी-चोकर की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है.
पाकिस्तान के कराची, लाहौर और इस्लामाबाद जैसे बड़े शहरों में आर्थिक तंगी और चारे के संकट के कारण एक सामान्य बकरी की कीमत 90,000 से 1,25,000 पाकिस्तानी रुपये तक पहुंच चुकी है. ईधन की बढ़ती कीमतों और खराब मौसम ने वहां भी मवेशियों की ढुलाई को बेहद महंगा कर दिया है. इसके बावजूद धार्मिक आस्था और परंपरा को निभाने के लिए बाजारों में खरीदारों का उत्साह कम नहीं हो रहा है.
















