नई दिल्ली: अमेरिकी न्याय विभाग ने एक सनसनीखेज खुलासा किया है. उनके अनुसार गुजरात की हाई सिक्योरिटी साबरमती जेल में बंद पंजाब का कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई जेल के अंदर से व्हाट्सऐप कॉल और मैसेज कर रहा था. रिपोर्ट में कहा गया है कि दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच उसने अमेरिका के लॉस एंजिल्स और थाउजेंड ओक्स में लोगों से करीब 5 मिलियन डॉलर यानी लगभग 41 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने की कोशिश की. इतना ही नहीं, अमेरिका ने लॉरेंस बिश्नोई और कनाडा में छिपे उसके साथी गोल्डी बराड़ पर खालिस्तानी कार्यकर्ता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आदेश देने का आरोप भी लगाया है. क्या है पूरा मामला चलिए जानते है.
जेल के अंदर चल रहा पूरा नेटवर्क
अमेरिकी एजेंसियों का कहना है कि बिश्नोई ने जेल की कोठरी में स्मगल किए गए प्रतिबंधित फोन और VoIP डिवाइस के जरिए यह सब किया।रिपोर्ट के मुताबिक वह इन्हीं उपकरणों से राजनीतिक हत्या, फायरिंग, जबरन वसूली, ड्रग्स और मानव तस्करी जैसी वारदातों को अंजाम दे रहा था. इसके साथ ही अमेरिकी रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि बिश्नोई का सिंडिकेट जानबूझकर धार्मिक, सामाजिक और सियासी नेताओं को निशाना बनाता है. हाई प्रोफाइल वारदात करके लोगों में डर पैदा किया जाता है और फिर उसी डर के नाम पर रंगदारी वसूली जाती है.
“24 घंटे सीसीटीवी निगरानी में है”
हालांकि लॉरेंस बिश्नोई की वकील रजनी खत्री ने अमेरिकी दावों को गलत बताया है. उनका कहना है कि उनका मुवक्किल 2023 से साबरमती जेल के एकांत कारावास में है. उस पर चौबीस घंटे सीसीटीवी कैमरों की निगरानी रहती है. गृह मंत्रालय ने BNS की धारा 303 के तहत उस पर जेल से बाहर ले जाने पर पूरी रोक लगा रखी है. अदालत की सुनवाई भी वह वीडियो कॉन्फ्रेंस से ही करता है. अगर किसी राज्य की पुलिस को पूछताछ करनी हो तो उसे खुद साबरमती आना पड़ता है. वकील ने सवाल उठाया कि “अगर व्हाट्सऐप इस्तेमाल हुआ है तो अधिकारी पुख्ता सबूत दें. वह सिर्फ अपनी लीगल टीम से ही मिलता है.” खत्री के अनुसार बिश्नोई पर दर्ज 84 मामलों में से 40 में वह बरी हो चुका है.
एनआईए भी लगा चुकी गंभीर आरोप
बता दें, 2022 में NIA ने भी अपनी चार्जशीट में कहा था कि बिश्नोई जेल से ही गैंग चलाता है. एजेंसी ने सिद्धू मूसेवाला हत्या केस का जिक्र करते हुए बताया था कि साजिश के वक्त बिश्नोई तिहाड़ में था, लेकिन वह गोल्डी बराड़ के साथ लगातार संपर्क में था. NIA के अनुसार गैंग जबरन वसूली के पैसे का एक बड़ा हिस्सा कनाडा, अमेरिका, दुबई, थाईलैंड और ऑस्ट्रेलिया भेजता है. वहीं इन्हीं पैसों से खालिस्तानी गतिविधियों को भी फंड किया जाता है.
इतना ही नहीं एजेंसी ने बिश्नोई की तुलना दाऊद इब्राहिम से भी की थी. कहा था कि जिस तरह दाऊद ने जेल से बैठकर अंडरवर्ल्ड खड़ा किया, उसी तरह बिश्नोई भी जेल की दीवारों के पीछे से पूरा सिंडिकेट चला रहा है. फिलहाल अमेरिकी आरोपों के बाद सुरक्षा एजेंसियां साबरमती जेल की सुरक्षा व्यवस्था की फिर से समीक्षा कर रही हैं. इस समीक्षा के बाद जो सामने आ पाएगा की दावों में कितनी सच्चाई है.











