होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ी कूटनीतिक हलचल, ओमान की मध्यस्थता से समाधान की उम्मीद

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Oman Iran Hormuz Strait
Oman Iran Hormuz Strait

नई दिल्ली: दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. हाल के तनाव और जहाजों पर हुए हमलों के बाद ईरान और ओमान के बीच शनिवार को एक महत्वपूर्ण बैठक हुई. इस दौरान समुद्री मार्ग को फिर से सामान्य रूप से संचालित करने और जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए कई विकल्पों पर चर्चा की गई. बैठक में कतर के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया.

ओमान की राजधानी मस्कट में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और ओमान के विदेश मंत्री सैयद बद्र अल-बुसैदी के बीच विस्तृत बातचीत हुई. बैठक का मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को फिर से सुचारु बनाना और क्षेत्र में बढ़े तनाव को कम करने के उपाय तलाशना था. सूत्रों के मुताबिक, चर्चा के दौरान समुद्री सुरक्षा, व्यापारिक जहाजों की आवाजाही और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सहयोग बढ़ाने जैसे मुद्दों पर भी विचार किया गया.

क्या है ओमान का नया प्रस्ताव?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ओमान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के संचालन के लिए एक नया मॉडल पेश किया है. इस प्रस्ताव के तहत जहाजों की आवाजाही के लिए दो अलग-अलग समुद्री मार्ग तय करने की बात कही गई है. प्रस्ताव के अनुसार, एक मार्ग ईरान के समुद्री क्षेत्र के पास रहेगा, जबकि दूसरा ओमान के जलक्षेत्र से होकर गुजरेगा. दोनों देश अपने-अपने हिस्से के मार्ग का स्वतंत्र रूप से संचालन और निगरानी करेंगे. साथ ही यह भी सुझाव दिया गया है कि किसी भी मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से कोई अतिरिक्त शुल्क या टोल नहीं लिया जाएगा.

ईरान ने तत्काल नहीं दी मंजूरी

बैठक में ओमान की ओर से यह प्रस्ताव औपचारिक रूप से रखा गया, लेकिन ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने इस पर तुरंत सहमति नहीं जताई. अधिकारियों का कहना है कि इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला लेने से पहले तेहरान में उच्च स्तर पर चर्चा की जाएगी. बताया जा रहा है कि ईरान इस योजना के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करेगा और उसके बाद ही अपना आधिकारिक रुख सामने रखेगा.

अमेरिका बैठक से रहा दूर

इस वार्ता में अमेरिका का कोई प्रतिनिधि शामिल नहीं था. हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि वे ओमान और कतर के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए हैं और घटनाक्रम पर नजर रख रहे हैं. रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने इस बातचीत में प्रत्यक्ष रूप से हिस्सा नहीं लिया, लेकिन क्षेत्र की स्थिति और आगे होने वाली चर्चाओं पर उसकी नजर बनी हुई है.

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