नई दिल्ली: विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के 2025-27 चक्र में भारतीय क्रिकेट टीम की किस्मत का फैसला आने वाले सात मुकाबलों से होने वाला है। फाइनल का टिकट हासिल करने के लिए भारतीय टीम को इन सातों मैचों में बेहद सतर्कता और आक्रामक रणनीति के साथ उतरना पड़ेगा। अब किसी भी मुकाबले में एक छोटी सी भूल या अंक गंवाना टीम इंडिया के लिए बेहद भारी पड़ सकता है। भारत को इस चक्र के तहत न्यूजीलैंड की धरती पर दो टेस्ट खेलने हैं, जिसके बाद उसे अपने घर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच मैचों की एक लंबी टेस्ट सीरीज में हिस्सा लेना है।
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू सीरीज की दोहरी चुनौती
न्यूजीलैंड दौरे के बाद भारत को अपने मैदानों पर ऑस्ट्रेलिया की मेजबानी करनी है। फिलहाल ऑस्ट्रेलिया अंक तालिका के शीर्ष पर बनी हुई है, जिसके चलते यह पांच मैचों की सीरीज भारत के लिए दोहरी अहमियत रखती है।
भारतीय टीम के पास न सिर्फ खुद अपनी झोली में अंक जोड़ने का मौका रहेगा, बल्कि वह अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी के अंक प्रतिशत को गिराकर उसे सीधे नुकसान भी पहुंचा सकती है।
न्यूजीलैंड दौरा तय करेगा भारत का सफर
भारत के इस महत्वपूर्ण अभियान की शुरुआत न्यूजीलैंड के कठिन विदेशी दौरे से होगी। विदेशी परिस्थितियों में खेले जाने वाले ये दो टेस्ट मैच डब्ल्यूटीसी की अंक तालिका में भारत का रुख निर्धारित करेंगे। अगर भारतीय टीम न्यूजीलैंड को उसकी ही जमीन पर दोनों मुकाबलों में हराने में सफल रहती है, तो ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आगामी घरेलू सीरीज से पहले उसका मनोबल और स्थिति दोनों बेहद मजबूत हो जाएंगे। इसके विपरीत, यदि न्यूजीलैंड में भारतीय टीम अंक गंवाती है, तो ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाले मुकाबलों में टीम पर दबाव कई गुना बढ़ जाएगा।
न्यूजीलैंड में हार का गणित और डब्ल्यूटीसी का इतिहास
अगर भारत न्यूजीलैंड में दोनों मुकाबले हार जाता है, तो राह बेहद मुश्किल हो जाएगी। ऐसी सूरत में ऑस्ट्रेलिया को 5-0 से क्लीन स्वीप करने के बावजूद भारत का अंतिम अंक प्रतिशत 59.26 ही रह जाएगा। फिर टीम इंडिया को अपने दम पर क्वालीफाई करने के बजाय अन्य देशों के नतीजों पर निर्भर रहना होगा। अगर इतिहास पर नजर डालें, तो पिछले डब्ल्यूटीसी चक्र में दक्षिण अफ्रीका ने 69.44 और ऑस्ट्रेलिया ने 67.54 फीसदी अंकों के साथ फाइनल में कदम रखा था।
उससे पहले 2023 के चक्र में भारत 58.80 फीसदी अंकों के साथ भी फाइनल में पहुंचने में कामयाब रहा था। यदि भारत अपने बचे हुए सातों टेस्ट जीत लेता है, तो उसका अंक प्रतिशत 70.37 हो जाएगा और वह आसानी से फाइनल में प्रवेश कर लेगा। वहीं, छह जीत और एक हार के साथ करीब 65 फीसदी अंक हासिल करके भी भारत की दावेदारी काफी मजबूत रहेगी। फिलहाल तस्वीर खराब नहीं है और सात मैच भारत की किस्मत बदलने के लिए काफी हैं।












