नई दिल्ली: नेपाल के उत्तरी पहाड़ी इलाकों में आई भीषण फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। अचानक आई बाढ़ के पानी में कई घर, सड़कें और इमारतें बह गईं। नेपाल पुलिस के मुताबिक, इस आपदा में अब तक 579 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 2000 लोग लापता या संपर्क से बाहर हैं, जिसमें लगभग 300 भारतीय नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं।
भोपाल से तीर्थयात्रा के लिए गया परिवार लापता
इस प्राकृतिक आपदा का असर भारत में रह रहे उन परिवारों तक भी पहुंचा है, जिनके अपने लोग नेपाल की यात्रा पर गए थे। भोपाल के कोलार इलाके की रहने वाली देवकी अधिकारी के परिवार के 29 सदस्य बाढ़ के बाद से लापता हैं. खबर है कि पूरा परिवार सावन पूर्णिमा के मौके पर नेपाल के गोसाईंकुंडा में तीर्थयात्रा के लिए गया था।
आखिरी फोन कॉल ने बढ़ाई चिंता
सामने आई एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, देवकी अधिकारी को गुरुवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे नेपाल से फोन आया था। फोन पर परिवार के लोगों ने बताया कि वे बाढ़ से बचने के लिए एक ऊंची पहाड़ी पर पहुंचे थे। इसके बाद उन्होंने एक स्थानीय व्यक्ति के घर में शरण लेने की कोशिश की, लेकिन पानी वहां भी घुस गया।
परिवार से हुई आखिरी बातचीत को याद करते हुए देवकी ने बताया कि फोन पर उनकी आवाज बेहद डरी हुई थी। परिवार के लोगों ने कहा था कि घर का एक हिस्सा पानी में डूब चुका है और उन्हें अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है. इस दौरान उन्होंने बच्चों का ध्यान रखने की अपील भी की थी। हालांकि इसके बाद परिवार से संपर्क टूट गया। परिजनों ने कई बार फोन मिलाया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। परिवार के मुताबिक, कुछ समय तक फोन कनेक्ट हो रहा था, लेकिन दूसरी तरफ से आवाज आना बंद हो गई।
29 लोगों का अब तक कोई सुराग नहीं
बताया गया है कि कृष्ण-राधिका खनाल और रामचंद्र-भवति खनाल अधिकारी समेत 29 लोगों का यह समूह तीर्थयात्रा पर गया था। परिवार के सदस्य अलग-अलग स्थानों पर ठहरे हुए थे लेकिन हादसे के बाद से किसी का भी पता नहीं चल सका है। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, लापता लोगों की तलाश और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राहत-बचाव अभियान जारी है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि चीन की ओर करीब 400 भारतीय फंसे हुए हैं, लेकिन वे सभी सुरक्षित हैं।











