18 महीने खर्चों पर ब्रेक लगाया, 7.2 लाख का फ्रीडम फंड बनाया: फिर छोड़ी 1.6 लाख वाली जॉब

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नई दिल्ली: सोचिए, क्या सिर्फ 7.2 लाख रुपये बचाकर कोई अच्छी खासी कॉर्पोरेट जॉब छोड़ सकता है? सुनने में ये फिल्मी लगता है, लेकिन एक महिला ने इसे सच कर दिखाया। न कोई करोड़ों की विरासत मिली, न कोई ट्रस्ट फंड।

उन्होंने सिर्फ 18 महीने तक एक सिंपल प्लान फॉलो किया और हर महीने 40 हजार रुपये बचाए। नतीजा ये हुआ कि आज उनकी कहानी सोशल मीडिया पर वायरल है। इंस्टाग्राम क्रिएटर रिया ने बताया कि कैसे उन्होंने अपनी जिंदगी की दिशा बदल ली।

18 महीने, 40 हजार महीना और बना 7.2 लाख का फ्रीडम फंड

रिया ने अपनी वायरल पोस्ट में बताया कि उन्होंने हर महीने 40 हजार रुपये अलग रखकर एक फ्रीडम फंड तैयार किया। 18 महीने में ये रकम 7.2 लाख रुपये हो गई। रिया कहती हैं कि ये सिर्फ पैसे नहीं थे, बल्कि उनके लिए एक बैकअप था जिसने उन्हें बड़े फैसले लेने की आजादी दी। उनका कहना है कि इस फंड ने उन्हें ये भरोसा दिया कि अगर नौकरी छोड़ी तो भी कुछ महीनों तक फाइनेंशियली सेफ रहेंगी।

कैसे बचाए हर महीने 40 हजार रुपये

रिया ने अपनी लाइफस्टाइल पूरी तरह नहीं बदली, लेकिन गैरजरूरी खर्चों पर ब्रेक लगा दिया। उन्होंने बताया कि बाहर खाने पर हर महीने करीब 20 हजार रुपये कम खर्च किए। 5 हजार रुपये की वो सब्सक्रिप्शन बंद कीं जिनका इस्तेमाल नहीं होता था।

शॉपिंग पर कंट्रोल करके 10 हजार रुपये बचाए। कॉफी, छोटी-मोटी आउटिंग और इम्पल्स बाइंग पर भी लगाम लगाई। इन छोटे-छोटे बदलावों ने मिलकर हर महीने 40 हजार रुपये की सेविंग्स का रास्ता बना दिया।

जिन चीजों पर समझौता नहीं किया

रिया साफ कहती हैं कि बचत का मतलब खुद को हर खुशी से दूर करना नहीं होता। उन्होंने हेल्थ, अच्छा खाना, पार्टनर के साथ समय और अच्छी नींद को हमेशा प्रायोरिटी पर रखा। उनके लिए ये चीजें नॉन नेगोशिएबल थीं। उनका मानना है कि अगर आप खुश और हेल्दी नहीं रहेंगे तो पैसे बचाने का भी कोई मतलब नहीं है।

जब आया नौकरी छोड़ने का सही समय

18वें महीने तक रिया की साइड इनकम उनकी 1.6 लाख रुपये महीने की सैलरी से ज्यादा हो गई थी। यही वो पॉइंट था जब उन्होंने कॉर्पोरेट जॉब को अलविदा कहने का फैसला लिया। आज उनके पास चार अलग इनकम सोर्स हैं। रिया कहती हैं कि फ्रीडम फंड ने उन्हें ये हिम्मत दी कि वो बिना डर के नया रास्ता चुन सकें। उनकी कहानी अब उन लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है जो नौकरी और पैशन के बीच फंसे हैं।

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