नई दिल्ली: फ्रांस में लगातार हो रहे हिंसक प्रदर्शन और लूटपाट के बीच राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सख्त फैसला लिया है। गुरुवार को खुफिया अधिकारियों और वरिष्ठ मंत्रियों के साथ हाई-लेवल बैठक के बाद मैक्रों ने कहा कि आने वाले दिनों में देश में अवैध प्रदर्शनों पर पूरी तरह रोक लगा दी जाएगी। मैक्रों ने साफ किया कि अराजक और बिना इजाजत वाले प्रदर्शनों पर बैन रहेगा, लेकिन ट्रेड यूनियनों जैसे संगठित समूहों के शांतिपूर्ण मार्च के लिए वैकल्पिक रास्ते दिए जाएंगे, ताकि आम लोगों और व्यापारियों की सुरक्षा बनी रहे। यह कदम देश में कानून-व्यवस्था बहाल करने और तोड़फोड़ रोकने के लिए उठाया गया है।
अल्ट्रा-लेफ्ट पर लगाया गणतंत्र गिराने का आरोप
राष्ट्रपति ने पिछले शनिवार को फ्रांस भर में हुई हिंसा के लिए अल्ट्रा-लेफ्ट समूहों और उपद्रवियों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, पिछले शनिवार को हमने संगठित अल्ट्रा-लेफ्ट समूहों की राजनीतिक और राजद्रोही हरकतें देखीं। उनका मकसद गणतंत्र को गिराना है और उन्होंने खुद इसे स्वीकार भी किया है।
कार्रवाई को लेकर मैक्रों ने बताया कि न्याय प्रणाली पूरी तरह सक्रिय है। अब तक कई हजार लोगों को हिरासत में लिया गया है और सैकड़ों को जेल भेजा गया है। उन्होंने कहा कि कार्रवाई अभी जारी रहेगी और सही समय पर आरोपियों की प्रोफाइल और उन पर चल रहे केसों की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।
ट्रंप की नसीहत पर पलटवार
इससे पहले मैक्रों ने फ्रांस के विरोध प्रदर्शनों पर टिप्पणी करने वाले विदेशी नेताओं पर भी निशाना साधा था। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि फ्रांस को बहुत देर होने से पहले अपनी सीमाएं बंद कर देनी चाहिए।
इस पर मैक्रों ने कहा कि वीकेंड पर हुई लूटपाट के बाद विदेशी स्तर पर बड़े पैमाने पर सूचनाओं में हेरफेर किया गया। उन्होंने कहा, कई विदेशी नेताओं के बेवकूफी भरे और अस्वीकार्य कमेंट्स आए हैं। हमने AI से बनी ऐसी तस्वीरें देखीं जिनमें फ्रांस की ऐसी घटनाएं दिखाई गईं जो कभी हुई ही नहीं। कुछ लोगों ने दावा किया कि हम प्रवासियों और उग्रवादियों की भीड़ से घिरे हैं, जो पूरी तरह झूठ है।












