नई दिल्ली: दुनिया में ज्यादातर मुसलमान शिया या सुन्नी समुदाय से जुड़े हैं। लेकिन एक ऐसा मुस्लिम समुदाय भी है, जो इन दोनों से अलग है। ये लोग इबादी इस्लाम को मानते हैं और अल्जीरिया के सहारा रेगिस्तान में रहते है, जिन्हें मोजाबाइट्स कहा जाता है। मोजाबाइट्स अल्जीरिया की एम’जाब घाटी में रहते हैं। यह इलाका घारदाया प्रांत में है और अपने पुराने शहरों, खास घरों और अलग तरह की जीवनशैली के लिए जाना जाता है। यहां की कई पुरानी बस्तियां किले जैसी बनी हुई हैं और इन शहरों की खास वास्तुकला के कारण एम’जाब घाटी को यूनेस्को की विश्व धरोहर में भी जगह मिली है।
इबादी इस्लाम को मानते हैं
इबादी इस्लाम को इस्लाम की पुरानी शाखाओं में गिना जाता है और इस समुदाय मानने वाले कुरान और धार्मिक नियमों को काफी महत्व देते हैं। दुनिया में इबादी समुदाय की सबसे बड़ी आबादी ओमान में है। इसके अलावा अल्जीरिया और कुछ दूसरे उत्तरी अफ्रीकी इलाकों में भी इबादी लोग रहते हैं। मोजाबाइट्स अपनी पुरानी परंपराओं को आज भी काफी हद तक बनाए हुए हैं। उनके सामाजिक और धार्मिक मामलों में समुदाय के बुजुर्गों की अहम भूमिका रहती है। शादी और परिवार से जुड़े मामलों में भी समुदाय के नियमों को महत्व दिया जाता है।
क्यों चर्चा में रहती हैं महिलाएं?
मोजाबाइट समुदाय की महिलाओं का पहनावा लोगों का खास ध्यान खींचता है। पारंपरिक रूप से कई विवाहित महिलाएं सफेद रंग का लंबा कपड़ा पहनती हैं, जिससे उनका शरीर और सिर ढका रहता है। वहीं बाहर निकलते समय चेहरे को भी ढक लिया जाता है और आमतौर पर सिर्फ आँखें दिखाई देती है। इसी वजह से उन्हें ‘एक आंख वाली महिलाएं’ कहा जाता है।
परंपरागत तौर पर महिलाएं घर और परिवार की जिम्मेदारियां संभालती हैं, जबकि पुरुष काम और व्यापार के लिए बाहर जाते हैं। कई मोजाबाइट लोग दूसरे शहरों में छोटी दुकानें और कारोबार चलाते हैं।
रेगिस्तान में कैसे चलता है जीवन?
सहारा के कठिन मौसम के बावजूद मोजाबाइट्स ने यहां अपनी जिंदगी को व्यवस्थित किया गया है। खजूर की खेती, व्यापार और हस्तशिल्प उनकी कमाई के प्रमुख साधन हैं। वे मिट्टी के बर्तन, गलीचे और गहने भी बनाते हैं। पानी की कमी वाले इस इलाके में पानी को बचाने और सही तरीके से इस्तेमाल करने की उनकी पारंपरिक व्यवस्था भी काफी खास है। इसी वजह से यह समुदाय सदियों से रेगिस्तान में अपनी अलग पहचान और जीवनशैली को बनाए हुए है।











