झारखंड में मानसून की धीमी रफ्तार से बढ़ी किसानों की चिंता, खरीफ फसल पर मंडराया संकट

0
8
Slow pace of monsoon in Jharkhand raises farmers' concerns
Chatgpt AI

रांची: झारखंड में इस साल कमजोर मानसून के कारण किसानों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. बात दें, जून महीने में सामान्य से काफी कम बारिश होने की वजह से कई जिलों में खरीफ फसल की तैयारियां प्रभावित हो रही है. जानकारी के अनुसार, खेतों में पर्याप्त नमी नहीं होने से किसान धान की नर्सरी तैयार करने और रोपाई की प्रक्रिया शुरू करने में पीछे रह गए हैं. 

60 प्रतिशत कम दर्ज की गई बारिश 

कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, राज्य में अब तक सामान्य वर्षा की तुलना में करीब 60 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है. अगर आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो धान उत्पादन पर इसका सीधा असर पड़ सकता है. राज्य के अधिकांश किसान धान की खेती पर निर्भर हैं, ऐसे में वर्षा की कमी उनकी चिंता बढ़ा रही है.

बारिश के कारण रुका खेतों का काम 

गढ़वा जिले के किसान भूषण सिंह ने बताया कि इस समय तक सामान्यतः धान की नर्सरी और खेत तैयार हो जाते हैं, लेकिन इस बार बारिश नहीं होने से खेती का काम शुरू ही नहीं हो पाया है. वहीं लातेहार जिले के किसान मनोरंजन किशन का कहना है कि खेतों की तैयारी अधूरी है और किसानों को समय पर बीज भी उपलब्ध नहीं हो पाए हैं. 

कब झारखंड पहुंचा था मानसून 

भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून 12 जून को झारखंड पहुंचा था, लेकिन बाद में इसकी गति धीमी पड़ गई. मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 26 जून के बाद मानसून दोबारा सक्रिय हो सकता है और जुलाई के पहले सप्ताह में अच्छी बारिश होने की संभावना है. इससे किसानों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है.

किन जिलों में वर्षा की सबसे अधिक कमी 

बारिश के आंकड़े भी स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं. बता दें, गढ़वा और साहिबगंज जिलों में वर्षा की सबसे अधिक कमी दर्ज की गई है. राज्य के अधिकांश जिलों में सामान्य से 40 से 90 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है. वहीं 23 जून तक जहां औसतन 122.6 मिलीमीटर वर्षा होनी चाहिए थी, जबकि केवल 49.5 मिलीमीटर बारिश ही रिकॉर्ड की गई. 

स्थिति को देखते हुए कृषि विशेषज्ञ किसानों को मक्का, मडुआ और दलहन जैसी कम पानी वाली फसलों की खेती अपनाने की सलाह दे रहे हैं. राज्य सरकार ने भी किसानों को राहत देने और वैकल्पिक कृषि गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में तैयारी शुरू कर दी है. वहीं अब देखना की आने वाले दिनों में क्या राज्य में मानसून की रफ्तार बढ़ती है या यही स्थिति कायम रहती है. 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here