कार्डियक अरेस्ट ने ली नाना पाटेकर की जान, क्या शरीर पहले देता है संकेत? जानिए किन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज

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नई दिल्ली: बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में अचानक निधन हो गया। गोवा के अपने घर पर उन्हें बेहोशी की हालत में पाया गया। सीने में तेज दर्द की शिकायत के बाद मेडिकल टीम पहुंची और उन्हें अस्पताल ले जाया गया। सुबह करीब 5:20 बजे डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शुरुआती रिपोर्ट में मौत की वजह कार्डियक अरेस्ट बताई जा रही है। उनके बेटे मल्हार ने भी इसकी पुष्टि की है। इस घटना ने फिर से कार्डियक अरेस्ट को लेकर लोगों में चिंता बढ़ा दी है। यह ऐसी इमरजेंसी है जिसमें वक्त बहुत कम मिलता है।

सरल भाषा में समझें तो कार्डियक अरेस्ट में दिल की धड़कन नियंत्रित करने वाला इलेक्ट्रिकल सिस्टम अचानक गड़बड़ा जाता है। दिल सही तरीके से धड़कना बंद कर देता है और शरीर में खून पंप नहीं हो पाता। दिमाग और बाकी अंगों तक ऑक्सीजन नहीं पहुंचती। व्यक्ति जल्दी बेहोश हो सकता है और सांस लेना भी बंद कर सकता है। तुरंत मदद न मिले तो जान जा सकती है।

हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में फर्क

बहुत लोग दोनों को एक समझते हैं, लेकिन ये अलग हैं। हार्ट अटैक में दिल तक खून पहुंचाने वाली नस में रुकावट आ जाती है। कार्डियक अरेस्ट में धड़कन का इलेक्ट्रिकल सिस्टम बिगड़ जाता है। हां, कभी-कभी हार्ट अटैक कार्डियक अरेस्ट का कारण भी बन सकता है।

दिल की अनियमित धड़कन, नसों की बीमारी, पहले हो चुका हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर, मांसपेशियों की समस्या, जन्मजात हार्ट कंडीशन या इलेक्ट्रिकल सिस्टम की गड़बड़ी से कार्डियक अरेस्ट हो सकता है। शरीर में ऑक्सीजन की कमी, ज्यादा खून बहना, गंभीर संक्रमण या कुछ दवाओं-जहरीले पदार्थों का असर भी जिम्मेदार हो सकता है।

किन संकेतों पर ध्यान दें? 

सबसे खतरनाक बात ये है कि कई बार कोई साफ संकेत नहीं मिलता। व्यक्ति अचानक गिर जाता है। लेकिन कुछ लोगों में पहले ये लक्षण दिख सकते हैं जैसे- सीने में दर्द या दबाव, सांस लेने में तकलीफ, चक्कर आना, अचानक कमजोरी धड़कन तेज या अनियमित होना और मतली या उल्टी। ये लक्षण दिखें तो नजरअंदाज न करें। हालत तेजी से बिगड़े तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।

इमरजेंसी में क्या करें?

अगर कोई अचानक गिर जाए, आवाज देने या हिलाने पर रिएक्शन न दे और सामान्य सांस न ले रहा हो, तो तुरंत एंबुलेंस बुलाएं। साथ ही सीपीआर शुरू कर दें। आसपास एईडी (डिफिब्रिलेटर) हो तो उसका इस्तेमाल करें। सीपीआर खून का प्रवाह बनाए रखता है और एईडी धड़कन ठीक करने में मदद कर सकता है। नाना पाटेकर की मौत ने एक बार फिर याद दिलाया है कि कार्डियक अरेस्ट में हर सेकंड मायने रखता है। लक्षण पहचानना और समय पर सीपीआर देना किसी की जान बचा सकता है। हर घर में इसकी बुनियादी जानकारी होना बहुत जरूरी है।

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